गोवा CM संग फोटो दिखा Smart Village के नाम पर मुंबई के बिजनेसमैन से करोड़ों की ठगी, आरोपी साजिद सय्यद गिरफ्तार

Mumbai Fraud News: गोवा में मुख्यमंत्री और कलेक्टर के साथ नजदीकी का झांसा देकर एक बिजनेसमैन से 1.13 करोड़ की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने मास्टरमाइंड डॉ. साजिद को दबोच लिया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Mumbai Busines Goa Smart Village Scam: सरकारी रसूख और मुख्यमंत्री के साथ तस्वीरों का इस्तेमाल कर मासूम निवेशकों को ठगने का एक बड़ा मामला गोवा से सामने आया है। गोवा में ‘स्मार्ट विलेज’ परियोजना (Smart Village Project) के नाम पर मुंबई के एक प्रतिष्ठित व्यवसायी से 1 करोड़ 13 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई है। इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में पुलिस ने मुख्य आरोपी डॉ. साजिद एन. सय्यद को गिरफ्तार कर लिया है।

कैसे बुना गया ठगी का जाल?

शिकायतकर्ता स्पीडकॉम इंटरनेट सर्विसेज प्रा. लि. के निदेशक देवेशानंद दिगंबर शिरोडकर (50) ने पुलिस को बताया कि आरोपी डॉ. साजिद ने खुद को “भारत CSR नेटवर्क” संस्था का अध्यक्ष बताया था। अगस्त 2024 में आरोपी ने शिरोडकर से संपर्क किया और दावा किया कि वह गोवा सरकार और मुख्यमंत्री के साथ मिलकर एक महत्वाकांक्षी 'स्मार्ट विलेज' प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है।

CM के साथ फोटो दिखाकर जीता भरोसा

आरोपी ने अपना प्रभाव जमाने के लिए गोवा के मुख्यमंत्री और कई जिला कलेक्टरों के साथ अपनी तस्वीरें और वीडियो दिखाए। उसने यह भ्रम पैदा किया कि उसे सरकार का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। आरोपी के झांसे में आकर शिरोडकर ने सितंबर 2024 में एक्सिस बैंक के चेक के माध्यम से 50 लाख रुपये की शुरुआती राशि जमा कर दी।

काम करवाया पर नहीं किया भुगतान

आरोपी ने विश्वास दिलाने के लिए पीड़ित की कंपनी से गोवा के फोंडा, शिरोडा और कोलवाले में इंटरनेट हॉटस्पॉट सेवा शुरू करवाई। पीड़ित ने जुलाई 2025 तक इस काम पर लगभग 58 लाख रुपये खर्च किए। इतना ही नहीं, मुंबई में बांद्रा पुलिस स्टेशन के पास 8 किमी फाइबर बिछाने और CCTV कैमरे लगाने पर भी 5 लाख रुपये खर्च किए गए।

जब भुगतान का समय आया, तो आरोपी टालमटोल करने लगा। न तो कोई आधिकारिक MoU साइन किया गया और न ही 'लेटर ऑफ एम्पैनलमेंट' की कोई कानूनी वैधता निकली। कुल मिलाकर शिरोडकर के साथ 1 करोड़ 13 लाख 4 हजार 586 रुपये की ठगी हुई है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी साजिद ने इसी तरह के फर्जी दस्तावेज दिखाकर अन्य लोगों को भी ठगा हो सकता है। पुलिस ने बिल, ट्रांजेक्शन और संदिग्ध दस्तावेजों को जब्त कर लिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि CSR और सरकारी प्रोजेक्ट्स के नाम पर निवेश करने से पहले आधिकारिक वेबसाइट्स पर वेरिफिकेशन जरूर करना चाहिए।

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