Sonu Nigam Birthday: रिजेक्शन, आंसू और संघर्ष, फिर ‘कल हो ना हो’ की आवाज बनकर छा गए सोनू निगम
Sonu Nigam Career: सोनू निगम ने सफलता से पहले कई रिजेक्शन झेले। एक समय स्टूडियो से रोते हुए लौटे थे, लेकिन हार नहीं मानी। कल हो ना हो, संदेसे आते हैं और हजारों गानों से उन्होंने अपनी पहचान बनाई।
- Written By: सोनाली झा
सोनू निगम (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
Sonu Nigam Birthday Special: बॉलीवुड गायक सोनू निगम का जन्म 30 जुलाई 1973 को हरियाणा के फरीदाबाद में हुआ था। सोनू निगम आज अपना 53वां जन्मदिन मना रहे हैं। सोनू निगम को संगीत विरासत में मिला। उनके पिता अगम कुमार निगम एक जाने-माने गायक थे। महज चार साल की उम्र में सोनू ने पहली बार मंच पर पिता के साथ मोहम्मद रफी का मशहूर गीत ‘क्या हुआ तेरा वादा’ गाया। उनकी मासूम आवाज ने तभी लोगों का दिल जीत लिया था।
संगीत को ही अपना करियर बनाने का सपना लेकर सोनू किशोरावस्था में अपने पिता के साथ मुंबई पहुंचे। हालांकि, यहां उन्हें तुरंत सफलता नहीं मिली। उन्होंने कई संगीतकारों और रिकॉर्डिंग स्टूडियो के चक्कर लगाए, लेकिन बार-बार निराशा हाथ लगी। एक इंटरव्यू में सोनू ने बताया था कि वह एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में बड़े उत्साह के साथ पहुंचे थे, लेकिन उन्हें गाने का मौका नहीं मिला। स्टूडियो से बाहर निकलते ही वह अपने आंसू रोक नहीं सके और फूट-फूटकर रो पड़े।
गुलशन कुमार ने बदली किस्मत
संघर्ष के दिनों में सोनू ने स्टेज शो किए और मोहम्मद रफी के गाने गाकर अपनी पहचान बनानी शुरू की। इसके बाद टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। साल 1992 में रिलीज हुई ‘रफी की यादें’ एल्बम ने उन्हें नई पहचान दिलाई। इसके बाद फिल्म ‘बेवफा सनम’ का गीत ‘अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का’ सुपरहिट साबित हुआ और सोनू निगम रातोंरात घर-घर में मशहूर हो गए।
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हजारों गीतों से बनाया संगीत का इतिहास
इसके बाद सोनू निगम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने संदेसे आते हैं, ये दिल दीवाना, कल हो ना हो, सूरज हुआ मद्धम, साथिया, मैं अगर कहूं, दो पल, शुकरान अल्लाह और अभी मुझमें कहीं जैसे कई यादगार गीत गाए। हिंदी के अलावा उन्होंने कन्नड़, तमिल, तेलुगु, बंगाली, मराठी समेत कई भाषाओं में 6,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए हैं।
सोनू निगम का करियर
सोनू निगम की शानदार गायकी के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, कई फिल्मफेयर अवॉर्ड, आईफा अवॉर्ड और वर्ष 2022 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। सोनू निगम की कहानी इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि संघर्ष, मेहनत और धैर्य के दम पर कोई भी सपना सच किया जा सकता है। रिकॉर्डिंग स्टूडियो से रोते हुए लौटने वाला वही युवा आज अपनी आवाज से करोड़ों दिलों की धड़कन बन चुका है।
