सिद्धार्थ मल्होत्रा-जाह्नवी कपूर की परम सुंदरी
Param Sundari Movie Review: रोमांटिक फिल्में तो हर जमाने में लोगों की फेवरेट रही हैं, लेकिन अब ऑडियंस भी कहती है कुछ नया दिखाओ भाई! और यहीं तुषार जलोटा के डायरेक्शन में बनीं परम सुंदरी अपना जादू चलाती है। ये फिल्म रोमांस को मॉडर्न पैकिंग में परोसती है, लेकिन दिल के तार छेड़ना भी नहीं भूलती। आजकल जहां प्यार बस लेफ्ट-राइट स्वाइप की गेम बनकर रह गया है, वहीं ये मूवी बड़े ही क्यूट अंदाज़ में याद दिलाती है कि असली प्यार न तो ऐप्स से मिलता है, न डेटा से। असली रोमांस छिपा है उस शरमाई मुस्कान में, उस चुप्पी में और उन छोटे-छोटे पलों में, जो दिल को सीधे छू जाते हैं।
परम यानी सिद्धार्थ मल्होत्रा दिल्ली का हैंडसम, थोड़े नखरे वाला बिज़नेसमैन है। वो स्टार्टअप्स में इन्वेस्ट करने का शौक रखता है, लेकिन आलम ये है कि उसका यह जुनून उसे नीचे की ओर लेकर जा रहा होता है। नतीजा? धड़ाम! इससे परेशान उसके पापा (संजय कपूर) का धैर्य भी जवाब दे चुका है। और इसी बीच वो एक और नया आइडिया इन्वेस्टमेंट के लिए अपने पापा के पास लेकर पहुंचता है, जहां वो उसे सीधा अल्टीमेटम दे देते हैं, यानी पहले अपना प्लान खुद पर आज़मा कर बताओ कि वो एक सक्सेस है, तभी मिलेगा फंड।
परम के हाथ लगने वाला आइडिया थोड़ा हटकर होता है, जो ऐप के जरिए सोलमेट से सीधा कनेक्ट करवाता है। सुनने में तो ये सुपरहिट है, लेकिन करने में मुश्किल। लेकिन पापा की शर्त पूरी करनी है, तो करना ही होगा। और क्या मज़ेदार संयोग है! ऐप का कंपास उसे दिल्ली की कैफ़े वाली लाइफ से खींचकर ले जाता है केरल के हरे-भरे गांव की गलियों में। वहीं एंट्री होती है सुंदरी यानी जान्हवी कपूर की। वह सिर्फ खूबसूरत ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और दिल से भरी पैकेज की तरह है। वह होमस्टे संभालती है, बहन की देखभाल करती है और फिर भी उसके चेहरे पर मुस्कान बनें रहता है। ऐसे में जब परम उसे देखता है और तब जैसे उसके सारे स्टार्टअप आइडिया उसी पल “स्टॉप” पर लग जाते हैं।
लेकिन असली कॉमेडी अब शुरू होती है, एक तरफ परम की दिल्ली वाली स्मार्टनेस, दूसरी तरफ सुंदरी की गांव वाली सादगी। दोनों की दुनिया अलग-अलग है, सोच टकराती है, और बीच-बीच में हालात हंसी का तड़का लगा देते हैं। अब सवाल ये है कि क्या ऐप का मैचिंग एल्गोरिधम जीत पाएगा, या फिर असली प्यार की कहानियां बिना किसी लॉगिन के ही लिखी जाती हैं?
परम बने सिद्धार्थ मल्होत्रा इस बार भी अपने उसी कूल अंदाज़ और शरारती स्टाइल से दिल जीत लेते हैं। रोमांस के टाइम उनका चार्म तो जैसे स्क्रीन पर ऑटोमैटिक ऑन हो जाता है, और कॉमिक सीन में उनकी टाइमिंग इतनी सही बैठती है कि हंसी रोकना मुश्किल हो जाता है।वहीं सुंदरी के रोल में जान्हवी कपूर तो सच में सरप्राइज पैकेज हैं। इतनी नैचुरल लगीं कि कई बार लगता ही नहीं कि ये एक्टिंग कर रही हैं। उनकी मासूम सी स्माइल और सादगी वाला अंदाज सीधा दिल पर वार करता है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है इसका पूरा लुक एंड फील। ज़रा सोचिए, एक तरफ दिल्ली की ट्रैफिक, हॉर्न और बिज़नेस मीटिंग्स, तो दूसरी तरफ केरल की नारियल के पेड़ों वाली हवा और शांति से भरी वादियां। दोनों का कॉन्ट्रास्ट इतना शानदार है कि स्क्रीन पर नज़रें गोंद की तरह चिपक जाती हैं। कपड़ों की बात करें तो यहां भी डिटेलिंग कमाल की है। परम अपने मॉडर्न, कूल लुक में बिल्कुल दिल्ली वाला स्मार्ट बॉय लगता है, जबकि सुंदरी की सादगी भरी साड़ियां उसे इतना रियल और प्यारा बना देती हैं कि दर्शक सोचें कि “यार, यही तो है असली खूबसूरती!”
ये भी पढ़ें- दो शादियों के बावजूद बॉलीवुड की इस हसीना पर दिल हार बैठे थे नागार्जुन अक्किनेनी
अब बात करते हैं म्यूज़िक की, जो इस फिल्म की असली जान है। गाने कभी ऐसे लगते हैं जैसे पार्टी में डीजे ने सही टाइम पर सही ट्रैक बजा दिया हो जिससे पूरा मूड सेट हो जाता है। कभी रोमांस इतना प्यारा दिखाते हैं कि दिल सचमुच मक्खन की तरह पिघलने लगे। और हां, कुछ गानों में मस्ती, इमोशन का ऐसा डोज है जो जुबान पर जैसे बस जाते हैं। सीधी बात, विजुअल्स और म्यूज़िक दोनों मिलकर फिल्म को ऐसा फ्लेवर देते हैं कि मज़ा दोगुना हो जाता है। अगर इस वीकेंड आपका मूड है थोड़ा हंसने का, थोड़ी प्यारी नोक-झोंक देखने का और दिल को छू जाने वाले रोमांस में डूबने का, तो परम सुंदरी आपकी बेस्ट चॉइस है।