Shruti Haasan Birthday: स्टार किड होने के बावजूद श्रुति हासन ने कैसे बनाई अपनी अलग पहचान?
Shruti Haasan Birthday Special: 28 जनवरी को श्रुति हासन अपना जन्मदिन मना रही हैं। जानें कैसे एक स्टार किड होने के बाद भी उन्होंने अपनी मेहनत से अभिनय और संगीत में अलग मुकाम हासिल किया।
- Written By: अनिल सिंह
Shruti Haasan Birthday (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Shruti Haasan: भारतीय सिनेमा में कुछ नाम ऐसे हैं, जो सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं हैं। ये नाम अपनी बहुआयामी प्रतिभा से एक अलग पहचान बनाते हैं। 28 जनवरी को अपना जन्मदिन मनाने वालीं श्रुति हासन ऐसी ही एक शख्सियत हैं। एक सफल अभिनेत्री, गायिका, संगीतकार और परफॉर्मर, जिनकी पहचान केवल एक ‘स्टार किड’ के तौर पर नहीं, बल्कि एक मेहनती और टैलेंटेड आर्टिस्ट के रूप में बनी है।
हासन परिवार में जन्म लेने के बावजूद श्रुति ने अपनी राह खुद बनाई। वह न सिर्फ एक सफल अभिनेत्री हैं, बल्कि एक स्थापित पार्श्व गायिका और म्यूजिक कंपोजर भी हैं, जिन्होंने तमिल, तेलुगु और हिंदी सिनेमा में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।
संगीत की औपचारिक शिक्षा और बचपन का हुनर
1986 में जन्मीं श्रुति हासन, दिग्गज अभिनेता कमल हासन और सारिका ठाकुर की बेटी हैं। उन्होंने मुंबई के सेंट एंड्रयूज कॉलेज से साइकोलॉजी की पढ़ाई की, लेकिन संगीत के प्रति उनके जुनून ने उन्हें अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित म्यूजिशियंस इंस्टीट्यूट तक पहुंचाया। महज छह साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता की फिल्म ‘थेवर मगन’ (1992) में पहला गाना गाया था। स्कूल के दिनों में उन्होंने ‘चाची 420’ में भी गायन किया, जो उनके संगीत के प्रति शुरुआती लगाव को दर्शाता है।
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‘लक’ से शुरुआत और साउथ सिनेमा में सफलता
श्रुति ने एक अभिनेत्री के तौर पर अपना डेब्यू 2009 में बॉलीवुड फिल्म ‘लक’ से किया था। हालांकि, उन्हें असली पहचान दक्षिण भारतीय सिनेमा से मिली। साल 2011 की तेलुगु फिल्म ‘अनागनगा ओ धीरुडु’ ने उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ नवागत अभिनेत्री’ का फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया। इसके बाद ‘रेस गुर्रम’ (2014) जैसी सुपरहिट फिल्मों के जरिए उन्होंने खुद को टॉप अभिनेत्रियों की सूची में शामिल कर लिया। हिंदी सिनेमा में भी उन्होंने ‘डी-डे’ और ‘गब्बर इज बैक’ जैसी फिल्मों में अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया।
सुर और स्क्रीन का अनोखा संगम
अभिनय के साथ-साथ संगीत श्रुति की पहचान का अभिन्न हिस्सा है। साल 2009 में उन्होंने अपने पिता के प्रोडक्शन ‘उन्नैपोल ओरुवन’ से बतौर म्यूजिक डायरेक्टर डेब्यू किया। वह अपना खुद का स्वतंत्र म्यूजिक भी तैयार करती हैं और अपने बैंड के जरिए परफॉर्म करती हैं। श्रुति का सफर इस बात का प्रमाण है कि पहचान केवल नाम से नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत और काम से बनती है। आज वे दक्षिण और उत्तर भारत के सिनेमाई पुल की एक मजबूत कड़ी के रूप में जानी जाती हैं।
