जगजीत सिंह के 72वें जन्मदिन पर गूगल ने ऐसे किया था उन्हें सम्मानित, जानें उनके किस्से
- Written By: संदीप पांडे
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मुंबई : मशहूर (Famous) सिंगर (Singer) जगजीत सिंह (Jagjit Singh) किसी नाम के मोहताज (Tempted) नहीं है। उन्होंने अपनी आवाज से लोगों के दिलों पर राज किया है। आज उनका 81वां जन्मदिन है। भले ही वो आज हमारे बीच नहीं है। लेकिन आज भी लोग उनके द्वारा गाए गए गानों को बड़े भाव से सुनते है। जगजीत सिंह एक गायक (Singer), संगीत निर्देशक (Music Director) और संगीतकार (Musician) थे। जगजीत सिंह का जन्म आज ही के दिन (8 फरवरी), 1941 को राजस्थान (Rajasthan) के श्रीगंगानगर (Shri Ganga Nagar) में हुआ था।
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सिंगर के पिता सरदार अमर सिंह धीमान सरकार के लोक निर्माण विभाग में सर्वेयर थे। जगजीत सिंह ने जालंधर से कला की शिक्षा ली। लेकिन उनके पिता चाहते थे कि जगजीत सिंह इंजीनियर बने। जगजीत सिंह ने अपने गायन करियर की शुरुआत 1961 में ऑल इंडिया रेडियो स्टेशन, जालंधर से की थी। गायक ने बाद में भारतीय शास्त्रीय संगीत के दृष्टिबाधित गुरु पंडित छगन लाल शर्मा और बाद में मैहर घराने के उस्ताद जमाल खान से संगीत सीखा था। 1965 में, जगजीत सिंह अपने परिवार को बताए बिना मुंबई चले गए थे।
उन्होंने जिंगल विज्ञापन के गायक के रूप में काम किया
जहां उन्होंने जिंगल विज्ञापन के गायक के रूप में काम किया और बाद में प्लेबैक सिंगर के रूप में आगे बढ़े। 1987 में जगजीत सिंह का एल्बम ‘बियॉन्ड टाइम’ भारत में पहली बार डिजिटली रूप से रिकॉर्डकर रिलीज किया गया था। जगजीत सिंह कई फिल्मों में गाना गाए थे। जिसमें साल 1966 में रिलीज फिल्म ‘बहुरूपी’ में ‘लागी राम भजन नी लगानी’, फिल्म ‘एक बार कहो’ में ‘राख के ढ़ेर ने’ और ‘फिर पुकारा है’, फिल्म ‘भावना’ में ‘मेरे दिल में तू ही तू है’, ‘फिर आए बरसात’ में ‘ना मोहब्बत ना दोस्ती के लिए’, ‘नरगिस’ में ‘दोनों के दिल है मजबूर प्यार से’, खलनायक में ‘ओ मां तुझे सलाम’, खुदाई में ‘दिन आ गए शबाब के’, फिल्म दुश्मन में ‘चिठी न कोई संदेश’ जैसे कई गानें शामिल है।
10 अक्टूबर को वो इस दुनिया को अलविदा कह गए थे
जगजीत सिंह को कई पुरस्कारों से नवाजा गया था। जिसमें उन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 2003 में पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था। 8 फरवरी 2013 को गूगल ने जगजीत सिंह को उनके 72वें जन्मदिन पर एक डूडल बनाकर उन्हें सम्मानित किया था। 23 सितंबर 2011 को जगजीत सिंह को ब्रेन हैमरेज हो गया था। 2 हफ्ते तक मुंबई के लीलावती हॉस्पिटल के कोमा में उनका इलाज चला। लेकिन 10 अक्टूबर को वो इस दुनिया को अलविदा कह गए थे।
