97 साल के बुजुर्ग को दी अनोखी अंतिम विदाई; दोस्तों ने श्मशान में ताश खेल मांगीलाल को दी श्रद्धांजलि
Rajasthan Unique Funeral: राजस्थान के नोहर में 97 वर्षीय मांगीलाल सैनी के निधन पर उनके दोस्तों ने श्मशान घाट पर ही ताश की बाजी खेलकर उन्हें अनोखी विदाई दी, जो इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
नोहर में दोस्तों ने श्मशान में ताश खेलकर दी श्रद्धांजलि, फोटो- सोशल मीडिया
Friends Playing Cards Crematorium Viral Video: राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के नोहर में एक ऐसी अंतिम विदाई देखने को मिली जिसने सबको भावुक और हैरान कर दिया। यहां 97 साल के मांगीलाल सैनी के अंतिम संस्कार के बाद उनके साथियों ने श्मशान में ताश की बाजी खेलकर अपने दोस्त को आखिरी सलाम पेश किया।
श्मशान घाट पर जमी ताश की बाजी अंतिम विदाई के समय आमतौर पर माहौल गमगीन और शांत होता है, लेकिन हनुमानगढ़ के नोहर में नजारा कुछ अलग था। यहाँ 97 वर्षीय मांगीलाल सैनी का अंतिम संस्कार संपन्न होने के बाद, जब सभी लोग श्मशान घाट पर बैठे थे, तब उनके पुराने दोस्तों ने एक अनूठा निर्णय लिया।
दोस्त की याद में खेला ताश
उन्होंने अपने दिवंगत मित्र को उसी अंदाज में याद करने का फैसला किया जैसा उन्हें जीवनभर पसंद था। दोस्तों ने श्मशान घाट पर ही ताश की गड्डी खोली और बाजी लगाना शुरू कर दिया। यह दृश्य उन लोगों के लिए अजीब हो सकता था जो मांगीलाल को नहीं जानते थे, लेकिन उनके करीबियों के लिए यह उनके प्रति प्यार जताने का सबसे सुंदर तरीका था।
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एक ऐसी विदाई की कहानी, जिसने आंखें भी नम की और दिल भी भर दिया। नोहर के 97 वर्षीय मांगीलाल सैनी ताश खेलते हुए ही इस दुनिया से विदा हो गए। मांगीलाल के लिए ताश सिर्फ खेल नहीं था, वह दोस्ती का पुल था, हंसी का कारण था, जीवन को जीने का बहाना था। जब उन्हें श्मशान घाट ले जाया गया तो… pic.twitter.com/DlIKTsj3Df — sushant pareek (@pareek12sushant) February 21, 2026
ताश खेलते हुए ही गई थी जान
मांगीलाल सैनी के बारे में बताया जाता है कि वे ताश के खेल के बहुत शौकीन थे। उनकी इस खेल के प्रति दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ताश खेलते समय ही उनका निधन हुआ था। शायद यही वजह थी कि उनके साथियों ने उनकी आत्मा की शांति के लिए इससे बेहतर श्रद्धांजलि और कोई नहीं समझी। उनके दोस्तों का मानना था कि मांगीलाल को ताश से बेहद लगाव था, इसलिए उनकी अंतिम विदाई भी इसी खेल के साथ होनी चाहिए।
खामोशी के बीच एक आखिरी ‘सलाम’
यह खेल किसी मनोरंजन या हंसी-मजाक के लिए नहीं था। चश्मदीदों के अनुसार, जब श्मशान घाट पर ताश की बाजी चल रही थी, तब वहां पूरी तरह खामोशी छाई हुई थी। न कोई शोर था और न ही कोई हंसी; दोस्त बस चुपचाप पत्ते फेंक रहे थे। उनके साथियों ने स्पष्ट किया कि यह उनके लिए केवल एक खेल नहीं, बल्कि अपने यार को दी गई एक ‘सच्ची श्रद्धांजलि’ और ‘आखिरी सलाम’ था। यह पूरी घटना अब पूरे इलाके में सच्ची दोस्ती की मिसाल के रूप में देखी जा रही है।
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परिजनों की सहमति और सामाजिक प्रतिक्रिया
आमतौर पर ऐसी घटनाओं पर विवाद होने की संभावना रहती है, लेकिन यहां मांगीलाल के परिजनों ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। परिजनों का कहना था कि मांगीलाल सैनी को ताश से गहरा भावनात्मक लगाव था, और यदि उनके मित्र उन्हें इस तरह याद कर रहे हैं, तो इसमें कुछ भी बुरा नहीं है। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में यह घटना चर्चा का केंद्र बनी हुई है। जहां कुछ लोग इसे अजीब मान रहे हैं, वहीं अधिकांश लोग इसे दोस्ती की एक अनूठी मिसाल और मृतक की इच्छाओं का सम्मान करने का एक भावुक तरीका बता रहे हैं।
