
निरूपा रॉय (फोटो-सोशल मीडिया)
Nirupa Roy Birth Anniversary: एक्ट्रेस निरूपा रॉय को आज भी ‘बॉलीवुड की मां’ के नाम से याद किया जाता है। उनकी अदाकारी में इतनी सच्चाई और इमोशनल होती थी कि दर्शक उन्हें केवल एक किरदार नहीं, बल्कि असल जिंदगी का हिस्सा मान लेते थे। उनकी रियल एक्टिंग का एक बेहद दिलचस्प और मशहूर किस्सा फिल्म ‘दो बीघा जमीन’ की शूटिंग से जुड़ा हुआ है।
यह बात साल 1953 की है, जब बिमल रॉय के निर्देशन में बन रही फिल्म ‘दो बीघा जमीन’ की शूटिंग कोलकाता की सड़कों पर चल रही थी। इस फिल्म में निरूपा रॉय और बलराज साहनी पति-पत्नी की भूमिका निभा रहे थे। फिल्म की खासियत यह थी कि कई सीन रियल लोकेशन पर, बिना भीड़ को बताए शूट किए गए थे ताकि सीन ज्यादा प्राकृतिक लगें। इसी कड़ी में एक सीन के दौरान टैक्सी के अंदर छुपा हुआ कैमरा लगाया गया था और दोनों कलाकारों को ट्राम के पास से सड़क पार करते हुए अभिनय करना था।
जैसे ही सीन शुरू हुआ, बलराज साहनी को चलते-चलते हल्की चोट लग गई। वह दर्द में दिखाई दिए और निरूपा रॉय ने भी स्वाभाविक प्रतिक्रिया दी। यह सब इतना असली लग रहा था कि वहां मौजूद लोग समझ ही नहीं पाए कि यह फिल्म की शूटिंग है। देखते ही देखते वहां खड़ी भीड़ गुस्से में आ गई और दोनों कलाकारों को लापरवाही के लिए खरी-खोटी सुनाने लगी। लोग उन्हें ऐसे डांट रहे थे, मानो कोई असली हादसा हो गया हो।
बाद में निरूपा रॉय ने एक इंटरव्यू में हंसते हुए इस किस्से को साझा किया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें उस वक्त समझ ही नहीं आ रहा था कि लोगों को कैसे बताया जाए कि वे सिर्फ अभिनय कर रहे हैं। यह घटना उनकी और बलराज साहनी की अभिनय क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण मानी जाती है, जहां दर्शक और राहगीर भी अभिनय और सच्चाई के फर्क को नहीं पहचान सके।
निरूपा रॉय का असली नाम कोकिला किशोरचंद्र बालसराफ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत गुजराती फिल्मों से की और बाद में हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। ‘दो बीघा जमीन’, ‘दीवार’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’ और ‘अमर अकबर एंथनी’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं। उनकी अदाकारी ने उन्हें सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की इमोशनल आत्मा बना दिया।






