मीरा राजपूत ने दीवाली पर पटाखों की परंपरा पर उठाए सवाल, कहा- ये खुशी नहीं, प्रदूषण है
Mira Rajput on Diwali: दीपावली के बाद बढ़ते प्रदूषण पर शाहिद कपूर की पत्नी मीरा राजपूत ने सोशल मीडिया पर अपनी राय रखी। उन्होंने लिखा कि पटाखे फोड़ना खुशी नहीं, बल्कि हवा में जहर घोलने जैसा है।
- Written By: सोनाली झा
मीरा राजपूत ने दीवाली पर पटाखों की परंपरा पर उठाए सवाल
Mira Rajput Message on Diwali: हर साल दीवाली के बाद हवा में घुलने वाला धुआं अब केवल आंकड़ों का हिस्सा नहीं रहा, बल्कि हमारी सेहत और पर्यावरण के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में दीपावली के बाद वायु प्रदूषण का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ गया। इस पर कई लोगों ने सोशल मीडिया पर चिंता जताई, जिनमें एक्टर शाहिद कपूर की पत्नी मीरा राजपूत कपूर भी शामिल हैं।
मीरा राजपूत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक लंबा नोट शेयर करते हुए पटाखों को जलाने की परंपरा पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने लिखा कि हम हर साल पटाखे फोड़ने को बच्चों की खुशी या पारंपरिक अनुभव के नाम पर दोहराते हैं, लेकिन यह सोच गलत है। अगर हम बड़े लोग इसे सामान्य मानेंगे, तो हमारे बच्चे भी यही सीखेंगे और यह सिलसिला कभी खत्म नहीं होगा।
मीरा राजपूत ने कही ये बात
मीरा ने यह भी कहा कि सिर्फ एक बार, सिर्फ देखने के लिए, या सिर्फ इंस्टाग्राम पर दिखाने के लिए पटाखे चलाना किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने खास तौर पर सोशल मीडिया पर दिखावे की संस्कृति पर निशाना साधा और कहा कि “सिर्फ एक सुंदर तस्वीर के लिए हाथ में फुलझड़ी लेकर पटाका एस्थेटिक दिखाना दरअसल हवा में जहर घोलने जैसा है।
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मीरा राजपूत ने किया कटाक्ष
मीरा राजपूत ने उन लोगों पर भी कटाक्ष किया जो साल भर पर्यावरण की बात करते हैं, बच्चों से ‘पटाखे नहीं जलाने’ के पोस्टर बनवाते हैं, लेकिन दीपावली पर खुद पटाखे फोड़ते हैं। मीरा ने इसे दोहरा मापदंड और पाखंड बताया। उनके अनुसार यह सिर्फ सोशल मीडिया की स्टोरी के लिए नहीं, बल्कि हमारे बच्चों की सांसों की बात है। जब पढ़े-लिखे, जागरूक और संपन्न लोग भी ऐसे मामलों में समझदारी नहीं दिखाते, तो यह और भी दुखद होता है।
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मीरा राजपूत का पर्यावरण पर संदेश
मीरा राजपूत ने आगे लिखा कि मैं अपने बच्चों को पटाखों का तमाशा नहीं दिखाती, क्योंकि यह उनकी सेहत और सोच दोनों के लिए गलत है। उन्होंने अपनी पोस्ट के अंत में लिखा कि अगर आज हमने अपने बच्चों को यह सिखा दिया कि असली खुशी शोर और धुएं में नहीं, बल्कि साफ हवा और सुकून में है, तो शायद आने वाली पीढ़ियां दीपावली को उसके असली अर्थ में मना पाएंगी, रोशनी, सादगी और प्रेम के साथ।
