लता मंगेशकर की आवाज से सीखा संगीत, बिना ट्रेनिंग के बनाई पहचान, जानें अनुराधा पौडवाल की कहानी
Anuradha Paudwal Birthday: अनुराधा पौडवाल ने बिना किसी औपचारिक ट्रेनिंग के सिर्फ लता मंगेशकर के गीत सुनकर संगीत सीखा। अनुराधा ने 500 से ज्यादा फिल्मों में गाया और कई भाषाओं में काम किया।
- Written By: सोनाली झा
अनुराधा पौडवाल (फोटो- सोशल मीडिया)
Anuradha Paudwal Birthday Special Story: भारतीय संगीत जगत में अनुराधा पौडवाल वह नाम हैं, जिन्होंने बिना किसी औपचारिक संगीत शिक्षा के भी सुरों की दुनिया में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनकी आवाज में वह मिठास, सादगी और गहराई थी, जिसने हर श्रोता के दिल को छू लिया। 27 अक्टूबर 1954 को कर्नाटक के कारवार जिले में जन्मी अनुराधा का बचपन मुंबई में बीता। उनका असली नाम अलका नाडकर्णी था, जिसे शादी के बाद उन्होंने बदलकर अनुराधा पौडवाल रखा।
अनुराधा को बचपन से ही संगीत में रुचि थी, लेकिन उन्हें कभी पारंपरिक शास्त्रीय ट्रेनिंग नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने संगीत सीखने का अपना अलग तरीका अपनाया, लता मंगेशकर के गाने सुनकर। वह रोजाना लता दीदी के गीतों को सुनतीं, उनके सुरों की बारीकियों को समझतीं और उसी अंदाज़ में अपनी आवाज को निखारतीं। धीरे-धीरे उनका रियाज इतना सधा कि उनकी आवाज में खुद की एक अनोखी पहचान बनने लगी।
अनुराधा पौडवाल का करियर
अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म ‘अभिमान’ से की थी, जिसमें उन्होंने जया भादुरी के लिए एक छोटा सा श्लोक गाया था। यही उनका पहला कदम था बॉलीवुड में। इसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक सुपरहिट गाने गाए, ‘जानेमन’, ‘उधार का सिंदूर’, ‘लैला मजनू’, ‘सरगम’, और ‘एक ही रिश्ता’ जैसी फिल्मों में उनकी आवाज ने जादू बिखेरा।
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अनुराधा पौडवाल की गाने
1990 का दशक उनके करियर का स्वर्ण युग माना जाता है। फिल्म ‘आशिकी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, और ‘बेटा’ जैसे ब्लॉकबस्टर एल्बम्स में उनके गाए गीतों ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया। इस दौरान उन्हें लगातार तीन बार फिल्मफेयर अवॉर्ड से नवाज़ा गया। अपने करियर में उन्होंने लगभग 554 फिल्मों में गीत गाए और हिंदी के अलावा पंजाबी, मराठी, बंगाली, तमिल, तेलुगु और नेपाली भाषाओं में भी अपनी आवाज दी। अनुराधा ने न सिर्फ फिल्मी गानों में बल्कि भक्ति संगीत में भी अपार योगदान दिया। टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार के साथ उनके भक्ति एल्बम बेहद लोकप्रिय हुए।
अनुराधा पौडवाल की भक्ति गीत
लेकिन साल 1997 में पति अरुण पौडवाल के निधन और गुलशन कुमार की हत्या के बाद, उन्होंने तय किया कि अब वे केवल भक्ति गीत ही गाएंगी। आज भी उनके भजन और भक्ति गीत लाखों लोगों के दिलों में श्रद्धा और सुकून का भाव जगाते हैं। अनुराधा पौडवाल ने यह साबित किया कि प्रतिभा के लिए प्रशिक्षण से अधिक जरूरी है समर्पण, मेहनत और संगीत के प्रति प्रेम। वह आज भी भारतीय संगीत की सबसे प्रेरणादायक हस्तियों में से एक हैं।
