ललिता पवार (फोटो- सोशल मीडिया)
Lalita Pawar Death Anniversary: भारतीय सिनेमा में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो अपने किरदारों के कारण अमर हो जाते हैं। ऐसी ही अभिनेत्री थीं ललिता पवार, जिन्हें लोग उनके असली नाम से ज्यादा ‘मंथरा’ के नाम से जानते हैं। रामायण में निभाए गए इस किरदार ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। आज उनकी पुण्यतिथि पर उनके संघर्ष और उपलब्धियों को याद किया जा रहा है।
18 अप्रैल 1916 को जन्मीं ललिता पवार का असली नाम अंबा था। उनके पिता लक्ष्मण राव शगुन एक संपन्न व्यापारी थे, लेकिन बचपन से ही उन्हें अभिनय का शौक था। महज 9 साल की उम्र में उन्होंने फिल्मों में कदम रखा। शुरुआती दौर में उन्होंने मूक फिल्मों में काम किया और धीरे-धीरे हिंदी सिनेमा का बड़ा नाम बन गईं। अपने लंबे करियर में उन्होंने 700 से ज्यादा हिंदी, मराठी और गुजराती फिल्मों में काम किया, जिसके चलते उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ।
फिल्मों में वह कभी लीड एक्ट्रेस रहीं, लेकिन असली पहचान उन्हें निगेटिव और सख्त सास के किरदारों से मिली। श्री 420, अनारी और दहेज जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को काफी सराहा गया। हालांकि, उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ एक हादसा बना। शूटिंग के दौरान सह-कलाकार भगवान दादा के एक थप्पड़ ने उनके चेहरे की नस को प्रभावित कर दिया, जिससे उनका चेहरा आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हो गया। इस घटना के बाद उन्हें लीड रोल मिलना बंद हो गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और कैरेक्टर रोल्स से दमदार वापसी की।
निजी जिंदगी भी कम संघर्षपूर्ण नहीं रही। पहली शादी गणपतराव पवार से हुई, लेकिन बहन के साथ पति के रिश्ते का पता चलने पर उन्होंने यह रिश्ता तोड़ दिया। बाद में उन्होंने राज कुमार गुप्ता से शादी की और एक बेटे जय पवार की मां बनीं। जिंदगी के अंतिम दिनों में उन्हें मुंह के कैंसर से जूझना पड़ा। 4 फरवरी 1998 को पुणे में उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया जाता है कि उनके अंतिम समय में परिवार साथ नहीं था। ललिता पवार ने अपने अभिनय से यह साबित किया कि असली कलाकार वही है जो हर परिस्थिति में खुद को साबित करे।