‘सोशल मीडिया बना नकारात्मकता का अड्डा’, करण जौहर ने ट्रोलिंग करने वालों पर उठाया सवाल
Karan Johar ने इंस्टाग्राम पर एक नोट पोस्ट करके सोशल मीडिया पर बढ़ती नकारात्मकता और शिष्टाचार में आई कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोग अब दूसरों की सफलता पर खुश होने के बजाय जलने लगे हैं।
- Written By: अनिल सिंह
Karan Johar On Social Media Negativity (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Karan Johar On Social Media Negativity: बॉलीवुड के मशहूर फिल्ममेकर और प्रोड्यूसर करण जौहर ने सोशल मीडिया पर एक लंबा नोट साझा करके समाज में बढ़ती नकारात्मकता, ट्रोलिंग और शिष्टाचार (Etiquette) में आई कमी पर चिंता व्यक्त की है।
करण जौहर ने सीधे तौर पर उन लोगों पर सवाल उठाए जो अपनी भड़ास निकालने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं।
शिष्टाचार और सम्मान में आई कमी
करण जौहर ने अपने नोट की शुरुआत में अच्छे व्यवहार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने लिखा कि आज लोग छोटे-छोटे शिष्टाचार लगभग भूलते जा रहे हैं।
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जवाब न देना: उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी मैसेज या ईमेल का ठीक से जवाब देना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि सम्मान और अपनापन छोटी-छोटी बातों से झलकता है, जैसे ‘ढंग से बात करना’ या सामने वाले को महसूस कराना कि उसकी बात मायने रखती है।
आलोचना और जलन का माहौल
करण जौहर ने इस बात पर चिंता जताई कि समाज में लोग अब दूसरों की सफलता पर खुश होने के बजाय जलने लगे हैं।
उन्होंने कहा कि किसी के आगे बढ़ने पर तारीफ कम और आलोचना ज्यादा होती है। वहीं, असफल होने पर लोग सहारा देने के बजाय उसका मजाक उड़ाते हैं। करण के अनुसार, यह सोच समाज को अंदर से कमजोर बनाती है। उन्होंने कहा कि आलोचना जरूरी है, लेकिन वह गुस्से और नफरत से रहित होनी चाहिए।
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सोशल मीडिया बना ‘नकारात्मकता का अड्डा’
करण जौहर ने सोशल मीडिया पर भड़ास निकालने वाले लोगों को निशाने पर लिया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सोशल मीडिया ‘नकारात्मकता का अड्डा बन गया है’।
उन्होंने लिखा कि लोग बिना सोचे-समझे अपनी निजी परेशानियां, गुस्सा और नकारात्मक सोच सबके सामने रख देते हैं। उन्होंने आग्रह किया कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए और इसे नफरत फैलाने का जरिया नहीं बनाना चाहिए।
जजमेंटल सोच और उपदेश
करण जौहर ने उन लोगों पर भी सवाल उठाए जो हर वक्त दूसरों को उपदेश देते रहते हैं, लेकिन खुद उस पर अमल नहीं करते। अंत में, उन्होंने जजमेंटल सोच पर बात की। उन्होंने कहा, “आज हर कोई खुद को नैतिकता का ठेकेदार समझने लगा है… दूसरों को जज करने से पहले हमें खुद के अंदर झांकना चाहिए, क्योंकि हर इंसान में कमियां होती हैं।”
