करण जौहर के 5 आसान तरीके, ऑनलाइन ट्रोलिंग से कैसे रखें खुद को शांत और खुश
Karan Johar Interview: बॉलीवुड फिल्ममेकर करण जौहर ने सोशल मीडिया ट्रोलिंग पर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि आलोचना और नकारात्मक कमेंट्स को वह कैसे हैंडल करते हैं।
- Written By: स्नेहा मौर्या
करण जौहर (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)
Karan Johar Trolling Criticism Advice: बॉलीवुड के मशहूर फिल्ममेकर और टेलीविजन होस्ट करण जौहर उन हस्तियों में शुमार हैं, जिनकी फिल्में परिवार, प्यार और रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती हैं। जहां एक ओर उनकी फिल्मों को दर्शकों का भरपूर प्यार मिलता है, वहीं सोशल मीडिया पर उन्हें लगातार आलोचना और ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ता है। हाल ही में आईएएनएस से बातचीत के दौरान करण जौहर ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी सोच साझा की।
करण जौहर का मानना है कि हर आलोचना को एक ही नजरिए से देखना गलत है। उन्होंने कहा कि अगर कोई दर्शक उनकी फिल्म देखकर अपनी ईमानदार राय रखता है और उसे पसंद नहीं करता, तो इसे नकारात्मक रूप में नहीं लेना चाहिए। ऐसी प्रतिक्रिया से सीखने की गुंजाइश होती है और यह एक कलाकार के लिए जरूरी भी है।
सोशल मीडिया ट्रोलिंग को लेकर करण जौहर ने की खुलकर बात
हालांकि, करण जौहर ने यह भी साफ किया कि सोशल मीडिया पर होने वाली ज्यादातर ट्रोलिंग का कोई ठोस आधार नहीं होता। उनके मुताबिक लगभग 95 प्रतिशत ट्रोलिंग ऐसे लोगों से आती है, जिन्हें वे जानते तक नहीं हैं। करण का कहना है कि अक्सर ये लोग अपने निजी जीवन से असंतुष्ट होते हैं और उसी निराशा को दूसरों पर निकालते हैं।
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उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति आपकी आवाज, चलने के अंदाज, फैशन या यहां तक कि परिवार को लेकर अपमानजनक बातें करता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप गलत हैं। बल्कि यह उस व्यक्ति की अंदरूनी नाखुशी को दर्शाता है। ऐसे लोगों पर गुस्सा करने के बजाय उनके लिए सहानुभूति महसूस करना मानसिक शांति बनाए रखने में मदद करता है।
बताए बेहद आसान तरीके
करण जौहर का नजरिया बेहद दिलचस्प है। उनका मानना है कि जब तक लोग आपके बारे में बात कर रहे हैं चाहे वह तारीफ हो या आलोचना तब तक आप प्रासंगिक हैं। किसी का पूरी तरह नजरअंदाज कर देना ज्यादा तकलीफदेह होता है, क्योंकि इसका मतलब होता है कि आपकी मौजूदगी मायने नहीं रखती।
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अपने अनुभव साझा करते हुए करण ने कहा कि वह एक मशहूर गीत की पंक्ति से खुद को जोड़कर रखते हैं, “कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना।” उनका मानना है कि हर बात को दिल पर लेने से बेहतर है खुद के काम और जिंदगी पर फोकस करना।
आखिर में करण ने यही सलाह दी कि अगर आलोचना ईमानदार न हो और सिर्फ नकारात्मकता फैलाने के लिए की गई हो, तो उसे नजरअंदाज करना ही बेहतर है। सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना ही असली सफलता की कुंजी है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
