शूटिंग के दौरान 2 एक्टर्स और डायरेक्टर की मौत, 24 साल बाद रिलीज हुई ये शापित फिल्म
Cursed Film: भारतीय सिनेमा की सबसे शापित मानी जाने वाली फिल्म 'लव एंड गॉड', जिसे बनने में 24 साल लगे। जानें, डायरेक्टर के. आसिफ और संजीव कुमार समेत 3 की मौत की दर्दनाक कहानी।
- Written By: अनिल सिंह
मुगल-ए-आजम से भी बड़ी फिल्म बना रहे थे के आसिफ, शूटिंग के दौरान हुआ मौत का तांडव
Most Cursed Film of Bollywood: भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसी फिल्म है जिसे ‘शापित’ (Cursed) कहा जाता है। महान फिल्ममेकर के. आसिफ (K. Asif), जिन्होंने ‘मुगल-ए-आजम’ जैसी कृति बनाई थी, उनकी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘लव एंड गॉड’ (Love and God) के साथ ऐसी मनहूसियत जुड़ी कि इसे बनने में पूरे 24 साल लग गए। इस फिल्म के सफर के दौरान खुद डायरेक्टर के. आसिफ और मुख्य अभिनेता संजीव कुमार समेत कई कलाकारों की मौत हो गई। हादसों से भरी यह फिल्म, जो 1960 के दशक में शुरू हुई थी, तमाम मुश्किलों के बाद साल 1986 में रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई।
यह फिल्म, जो लैला-मजनूं की कहानी पर आधारित थी, 1962 में शुरू हुई। सबसे पहले मजनूं का रोल गुरु दत्त को मिला था, लेकिन निजी और आर्थिक परेशानियों के चलते 1964 में उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद चार साल तक काम रुका रहा। 1970 में के. आसिफ ने संजीव कुमार को लेकर शूटिंग फिर से शुरू की। लेकिन, एक साल बाद 1971 में खुद डायरेक्टर के. आसिफ का निधन हो गया। इसके बाद फिल्म को पूरा करने का बीड़ा के. आसिफ की पत्नी अख्तर आसिफ और बाद में निर्माता केसी बोकाडिया ने उठाया।
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दो डायरेक्टर्स की मौत का साया
‘लव एंड गॉड’ के साथ दो डायरेक्टर्स की मौत का साया जुड़ा हुआ है। सबसे पहले, फिल्म के ओरिजिनल डायरेक्टर और मास्टरमाइंड के. आसिफ का फिल्म के बीच में ही निधन हो गया। उनके निधन के बाद, फिल्म को रिवाइव किया गया और यह मान लिया गया कि अब सब ठीक हो जाएगा। लेकिन, इतने बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी जिसने भी ली, उसे भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अंततः, कई प्रयासों के बाद भी फिल्म को वह रूप नहीं मिल पाया, जो के. आसिफ देना चाहते थे।
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संजीव कुमार के बॉडी डबल से पूरी हुई शूटिंग
फिल्म के पूरा होने के अंतिम चरण में मुख्य अभिनेता संजीव कुमार की भी 1985 में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। संजीव कुमार ने इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी जिंदगी के कई साल दिए थे। उनकी असामयिक मृत्यु के बाद, निर्माता केसी बोकाडिया ने हार नहीं मानी। उन्होंने बची हुई शूटिंग को बॉडी डबल का इस्तेमाल करके और वॉयस ओवर (Voice Over) की मदद से पूरा किया। एडिटिंग इतनी खराब थी कि फिल्म का कबाड़ा ही हो गया, लेकिन निर्माताओं ने अपने लगे हुए पैसे को देखते हुए इसे रिलीज करने का फैसला किया।
24 साल बाद रिलीज और बॉक्स ऑफिस पर आपदा
‘लव एंड गॉड’ को 24 साल की लंबी अवधि के बाद 1986 में रिलीज किया गया। फिल्म अपने रिलीज होने के सालों पहले ही ‘शापित’ मानी जाने लगी थी, और यही बात बॉक्स ऑफिस पर सच साबित हुई। वर्षों की देरी, खराब एडिटिंग और मुख्य कलाकारों के निधन के कारण यह फिल्म दर्शकों को प्रभावित नहीं कर पाई और बुरी तरह फ्लॉप रही। यह आज भी भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे मनहूस और दुर्भाग्यपूर्ण फिल्मों में से एक के रूप में दर्ज है।
