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1 साल से आ रहा है सुसाइड का ख्याल, चरित्र हनन पर साध्वी हर्षा रिछारिया का छलका दर्द

Harsha Richhariya News: हर्षा रिछारिया ने धर्म छोड़ने का ऐलान करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मानसिक प्रताड़ना के कारण उन्हें सुसाइड के ख्याल आने लगे थे।

  • By अनिल सिंह
Updated On: Jan 14, 2026 | 08:33 PM

Harsha Richhariya (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)

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Harsha Richhariya Suicide Thought: प्रयागराज महाकुंभ से साध्वी के रूप में रातों-रात प्रसिद्धि पाने वाली हर्षा रिछारिया ने एक बार फिर अपने बयानों से सनसनी फैला दी है। धर्म और अध्यात्म की राह पर चलने का संकल्प लेने वाली हर्षा ने अब इस रास्ते को छोड़ने का अंतिम फैसला कर लिया है। आईएएनएस (IANS) से खास बातचीत में उन्होंने खुलासा किया कि पिछले एक साल में उन्हें इतनी मानसिक प्रताड़ना दी गई कि उनके मन में कई बार आत्महत्या (Suicide) करने के विचार आए।

हर्षा का आरोप है कि संत-समाज और धर्म के ठेकेदारों ने उनके मनोबल को तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने समाज की दोहरी मानसिकता पर प्रहार करते हुए कहा कि जो लोग मंचों से स्त्री को आदिशक्ति कहकर पूजने की बात करते हैं, असल में वही लोग किसी महिला को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ता देख बर्दाश्त नहीं कर पाते। इसी मानसिक दबाव के कारण उन्होंने वापस अपने पुराने पेशे यानी एंकरिंग और मॉडलिंग में लौटने का निर्णय लिया है।

‘मैं सीता नहीं हूं जो हर बार परीक्षा दूं’

हर्षा रिछारिया ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उनके चरित्र पर कीचड़ उछाला गया और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई गई। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “मैं कोई मां सीता नहीं हूं जो बार-बार अपनी पवित्रता की अग्नि परीक्षा दूं। इंसान के सहने की एक सीमा होती है और मेरी वह सीमा अब खत्म हो चुकी है। मेरे लिए घुट-घुट कर मरने से कहीं बेहतर नया रास्ता चुनना लगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म छोड़ने का यह फैसला उनकी इच्छा नहीं, बल्कि उनकी मजबूरी है।

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एंकरिंग और ग्लैमर की दुनिया में वापसी

अपने पुराने पेशे पर बात करते हुए हर्षा ने कहा कि एंकरिंग और मॉडलिंग के रास्ते में कुछ भी गलत नहीं था। उनके अनुसार, “वहां केवल शोर था—कहीं पश्चिमी शैली का तो कहीं आध्यात्मिक। मेरी असली पहचान वहीं से शुरू हुई थी।” हर्षा का मानना है कि अपनी खोई हुई गरिमा और मान-सम्मान को वापस पाने के लिए उन्हें उसी जगह लौटना होगा जहाँ से उन्होंने शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि समाज अब यह तय नहीं करेगा कि उन्हें कब क्या बोलना है और कैसे रहना है।

नर्मदा तट पर अंतिम स्नान और ईश्वर की इच्छा

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर हर्षा रिछारिया नर्मदा नदी में स्नान करने पहुंचीं। उन्होंने इस अनुभव को अविश्वसनीय बताते हुए कहा, “नर्मदा तट पर जाना मेरा सौभाग्य था। इसकी कोई पूर्व योजना नहीं थी, यह सब ईश्वर की इच्छा से हुआ।” उन्होंने इसे अपने जीवन के एक अध्याय का अंत और दूसरे की शुरुआत बताया। मकर संक्रांति को साल का पहला त्योहार मानते हुए उन्होंने नर्मदा मैया की गोद में अपने पुराने संकल्पों को विराम दिया और एक स्वतंत्र जीवन की ओर कदम बढ़ाया।

Harsha richhariya quits spirituality suicide thoughts allegations

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Published On: Jan 14, 2026 | 08:33 PM

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