घूसखोर पंडत (फोटो- सोशल मीडिया)
Supreme Court on Ghooskhor Pandat Title: फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के शीर्षक को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि फिल्म का नाम नहीं बदला गया तो इसकी रिलीज की अनुमति नहीं दी जाएगी। शीर्षक को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर समाज के किसी वर्ग को अपमानित या बदनाम करने की छूट नहीं दी जा सकती।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की पीठ ने कहा कि क्रिएटिव स्वतंत्रता लोकतंत्र का अहम हिस्सा है, लेकिन यह पूर्णतः निरंकुश अधिकार नहीं है। इसे संविधान के मूल्यों और सामाजिक संवेदनशीलता के दायरे में रहकर ही प्रयोग किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जब समाज पहले से ही विभाजन और तनाव के दौर से गुजर रहा हो, तब ऐसे शीर्षक सामाजिक अशांति को बढ़ा सकते हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं, निर्देशकों और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा कि आपत्तिजनक शीर्षक के बावजूद फिल्म की रिलीज क्यों न रोकी जाए। साथ ही निर्माताओं से यह भी पूछा गया कि क्या फिल्म की सामग्री में किसी समुदाय विशेष के प्रति अपमानजनक या आपत्तिजनक बातें मौजूद हैं। इस संबंध में कोर्ट ने हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
पीठ ने ‘बंधुत्व’ को संविधान की मूल संरचना का हिस्सा बताते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रयोग इस मूल भावना को कमजोर नहीं कर सकता। अदालत ने साफ चेतावनी दी कि यदि निर्माता नया नाम प्रस्तावित नहीं करते या आवश्यक संशोधन नहीं करते, तो न्यायालय हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगा। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को तय की गई है। उस दिन यह देखा जाएगा कि फिल्म निर्माता शीर्षक बदलने या अन्य संशोधन करने के लिए क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद घूसखोर पंडत की रिलीज पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।