Father’s Day 2025: पिता और बच्चों के रिश्ते पर बनी ये 5 बॉलीवुड फिल्में जरूर देखें

बॉलीवुड में पिता और बच्चे के बीच के अनमोल रिश्ते पर कई फिल्में बने हैं। ‘फादर्स डे’ के खास मौके पर आज हम आपको उन फिल्मों की जानकारी देंगे, जिसने पिता और बच्चे के बीच के रिश्ते को पर्दे पर दिखाया है।
Father’s Day 2025: पिता और बच्चों के रिश्ते पर बनी ये 5 बॉलीवुड फिल्में जरूर देखें
पिता और बच्चों के रिश्ते पर बनी ये 5 बॉलीवुड फिल्में जरूर देखें
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मुंबई: फादर्स डे सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि उस अनमोल रिश्ते को सेलिब्रेट करने का मौका है जो एक पिता और उसके बच्चों के बीच होता है। बॉलीवुड में भी इस रिश्ते को कई बार खूबसूरती और संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारा गया है। इस खास मौके पर आप अपने पिता के साथ मिलकर इन भावनात्मक फिल्मों को देख सकते हैं, जो प्यार, त्याग और समझदारी की मिसाल पेश करती हैं।

मासूम

गुलजार के निर्देशन में बनी 'मासूम' फिल्म एक ऐसे पिता की कहानी है, जिसे अचानक अपने बीते अतीत से जन्मे बेटे का सामना करना पड़ता है। नसीरुद्दीन शाह, शबाना आज़मी, और नन्हे जुगल हंसराज की अदाकारी इस रिश्ते को दिल छू जाने वाला बनाती है। यह फिल्म बताती है कि पिता बनने की जिम्मेदारी सिर्फ खून का रिश्ता नहीं, बल्कि प्यार और समझदारी भी होती है।

अमिताभ बच्चन की फिल्म पा

अमिताभ बच्चन ने फिल्म 'पा' में एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित बच्चे ‘ऑरो’ का किरदार निभाया, जबकि अभिषेक बच्चन ने उनके पिता का रोल निभाया। बाल स्वरूप में बिग बी का अभिनय और पिता-पुत्र के रिश्ते की संवेदनशीलता इस फिल्म को खास बनाती है। यह फिल्म दर्शाती है कि एक सच्चा पिता अपने बच्चे की खुशी के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

शूजीत सरकार की पीकू

शूजीत सरकार की यह फिल्म पिता-पुत्री के रिश्ते को एक मज़ेदार लेकिन गहराई भरे अंदाज़ में पेश करती है। दीपिका पादुकोण और अमिताभ बच्चन की केमिस्ट्री और इरफान खान की शांत मौजूदगी फिल्म को यादगार बनाती है। यह फिल्म दिखाती है कि बुढ़ापे में भी पिता को बेटी के सहारे की जरूरत होती है।

अजय देवगन की फिल्म दृश्यम

थ्रिलर होते हुए भी यह फिल्म एक पिता के संघर्ष को केंद्र में रखती है, जो अपनी बेटी को बचाने के लिए पूरी सिस्टम से टकरा जाता है। अजय देवगन का शांत लेकिन मजबूत किरदार बताता है कि एक पिता अपने बच्चों के लिए क्या कुछ कर सकता है।

सुशांत सिंह राजपूत की छिछोरे

सुशांत सिंह राजपूत की यह फिल्म एक पिता की कहानी है, जो अपने बेटे को आत्महत्या से बचाने के लिए अपनी असफलताओं की कहानी सुनाता है। यह फिल्म बताती है कि असफलता का मतलब हार नहीं होता और पिता का साथ जीवन बदल सकता है।

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