आज अच्छी फिल्में बनाना और रिलीज कराना मुश्किल हो गया है’, बीरेंद्र भगत ने खुलकर रखी अपनी बात
Birendra Bhagat: दिल्ली शब्दोत्सव 2026 में निर्माता बीरेंद्र भगत ने कहा कि अच्छी फिल्में बनाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण पर बनी अपनी फिल्म 'हम दो हमारे बारह' पर लगे आरोपों को खारिज
- Written By: अनिल सिंह
Birendra Bhagat In Delhi Shabdotsav 2026 (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Delhi Shabdotsav 2026: दिल्ली शब्दोत्सव 2026 में हिंदी सिनेमा में बनने वाली विवादास्पद और समाज से जुड़ी फिल्मों पर खुलकर चर्चा हुई। इस सत्र में फिल्म निर्माता बीरेंद्र भगत (फिल्म ‘हम दो हमारे बारह’) और निर्देशक-लेखक एम.के. शिवाक्ष (फिल्म ‘गोधरा’) ने हिस्सा लिया और बताया कि किस तरह समाज की कुरीतियों पर आधारित फिल्में बनाना और उन्हें दर्शकों तक पहुंचाना आज कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
एम.के. शिवाक्ष ने दिल्ली शब्दोत्सव जैसे कार्यक्रमों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे मंचों का होना बहुत जरूरी है, क्योंकि ये छोटे निर्देशकों और निर्माताओं को एक मंच देते हैं, जो बिना किसी व्यावसायिक दबाव के समाज से जुड़ी यथार्थवादी फिल्में बनाते हैं।
‘अच्छी फिल्में बनाना और रिलीज कराना मुश्किल’
फिल्म निर्माता बीरेंद्र भगत ने अपनी फिल्म ‘हम दो हमारे बारह’ के संदर्भ में समाज का दर्पण कही जाने वाली फिल्मों के सामने आने वाली चुनौतियों पर बात की।
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विवादों का सामना: भगत ने कहा कि अक्सर ऐसी फिल्में रिलीज से पहले ही विवादों में आ जाती हैं। उन्होंने अपनी फिल्म का उदाहरण देते हुए कहा, “पीएम मोदी भी देश में जनसंख्या नियंत्रण की बात करते हैं और हमने भी देशहित से जुड़ी फिल्म दिखाई। महिलाओं की दुर्दशा को दिखाया, लेकिन हमारी फिल्म पर एक विशेष समुदाय को टारगेट करने का आरोप लगा, जबकि ऐसा नहीं है।”
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आज की चुनौती: उन्होंने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “आज के समय में अच्छी फिल्में बनाना और रिलीज कराना मुश्किल हो गया है।”
जनसंख्या नियंत्रण: भगत ने देश के सबसे बड़े मुद्दे, जनसंख्या नियंत्रण पर जोर देते हुए कहा कि हमने चीन को जनसंख्या के मामले में पहले ही पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि हमें यह समझना होगा कि जनसंख्या नियंत्रण कितना जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर हमारे संसाधनों पर पड़ता है। उन्होंने महंगाई का हवाला देते हुए कहा कि आज के समय में ज्यादा बच्चों को पाल पाना आर्थिक रूप से मुश्किल है।
‘गोधरा’ को प्रोपेगेंडा बताकर किया गया अनदेखा: एम.के. शिवाक्ष
फिल्म के निर्देशक और लेखक एम.के. शिवाक्ष ने अपनी फिल्म ‘गोधरा’ (जो 2024 में रिलीज हुई) पर बात की।
ओटीटी पर अनदेखी: शिवाक्ष ने कहा कि ‘गोधरा‘ जैसी फिल्मों को अक्सर ‘प्रोपेगेंडा’ बताकर अनदेखा कर दिया जाता है और इन्हें ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर जगह नहीं मिलती। हालांकि, उन्होंने दर्शकों को खुशखबरी दी कि यह फिल्म जल्द ही जी फाइव (Zee5) ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली है।
संघर्ष भरा निर्माण: उन्होंने बताया कि इस फिल्म को बनाने में 5 साल लगे और इसे सेंसर बोर्ड से पास कराने में भी बहुत मेहनत लगी थी। उन्होंने दर्शकों से अपील की कि वे फिल्म को एक बार जरूर देखें।
