The Odyssey Review: क्रिस्टोफर नोलन की सरल कहानी और शानदार आईमैक्स एक्सपीरियंस का शानदार मेल है फिल्म
Christopher Nolan The Odyssey: क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' सरल कहानी, शानदार IMAX विजुअल्स और दमदार स्टारकास्ट के साथ एक बेहतरीन सिनेमाई अनुभव देती है। मैट डेमन और टॉम हॉलैंड का अभिनय प्रभावशाली है।
- Written By: सोनाली झा
द ओडिसी रिव्यू (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
Christopher Nolan The Odyssey Review: क्रिस्टोफर नोलन अक्सर अपनी जटिल कहानियों, समय के चक्रव्यूह और भौतिकी के सिद्धांतों पर आधारित फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। लेकिन ‘द ओडिसी’ के साथ उन्होंने अपनी शैली में एक बड़ा बदलाव किया है। इस बार वह एक ऐसी सीधी और सरल कहानी लेकर आए हैं जिसे समझने के लिए किसी को ‘बुद्धिमान’ होने या जटिल टाइमलाइन्स को सुलझाने की जरूरत नहीं है।
कहानी बेहद साधारण है, ट्रोजन युद्ध के बाद नायक ओडिसियस और उसके साथियों का अपने घर वापस लौटने का लंबा, खतरनाक और संघर्षों से भरा सफर। हालांकि, कहानी की यह सरलता नोलन के उन प्रशंसकों को थोड़ा निराश कर सकती है जो उनकी फिल्मों में दिमागी कसरत की उम्मीद लेकर जाते हैं। इस फिल्म को हमने 3.5 स्टार्स दिए हैं और इसकी वजह जानने के लिए पढ़ें ये रिव्यू।
आईमैक्स का बेहतरीन जादू पर खींचता हुआ स्क्रीनप्ले
तकनीकी रूप से यह फिल्म बेहद लाजवाब है। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका विजुअल और सिनेमैटोग्राफी है, जिसे पूरी तरह से आईमैक्स कैमरों से फिल्माया गया है। कई फ्रेम इतने भव्य और लुभावने हैं कि वे दर्शकों को हैरान कर देते हैं। साउंड डिज़ाइन और लुडविग गोरांसन का बैकग्राउंड स्कोर भी शानदार है जो साधारण दृश्यों को भी एक अलग ऊंचाई पर ले जाता है।
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दमदार स्टार कास्ट लेकिन अधूरे किरदारों का तालमेल
‘द ओडिसी’ की स्टार कास्ट बेहद शानदार है, लेकिन सामग्री की सीमा के कारण सभी को पूरा स्पेस नहीं मिल पाया। मैट डैमन ने ओडिसियस के रूप में अपने किरदार के दर्द और थकान को बेहतरीन ढंग से व्यक्त किया है। उनके बेटे टेलीमैकस के किरदार में टॉम हॉलैंड ने अपनी चिर-परिचित स्पाइडर-मैन वाली छवि से बाहर निकलकर एक परिपक्व और भावुक अभिनय किया है।
विलेन के रूप में नजर आए रॉबर्ट पैटिनसन
रॉबर्ट पैटिनसन विलेन के रूप में दमदार नजर आते हैं, जबकि ऐन हैथवे और ज़ेंडया ने अपने संक्षिप्त किरदारों में ठीक-ठाक काम किया है। हालांकि, फिल्म का पहला घंटा बहुत से किरदारों की भीड़ से भरा हुआ लगता है, जिससे दर्शकों को किसी भी किरदार के साथ गहराई से जुड़ने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। लुपिटा न्योंगो द्वारा हेलेन ऑफ ट्रॉय के रूप में किया गया रचनात्मक फैसला भी थोड़ा अजीब और उलझाने वाला लगता है।
फिल्म का फाइनल टेक
‘द ओडिसी’ एक बहुत अच्छी फिल्म तो है, लेकिन यह क्रिस्टोफर नोलन की सबसे महान फिल्मों की श्रेणी में शामिल होने से चूक जाती है। इसकी सबसे बड़ी वजह इसका जरूरत से ज्यादा सीधा होना और कमजोर पेसिंग है। इसके बावजूद, एक सिनेमाई अनुभव के रूप में यह दर्शकों को निराश नहीं करती। यदि आप जटिल गुत्थियों को सुलझाने की उम्मीद छोड़ दें, तो आईमैक्स स्क्रीन पर नोलन का भव्य विजुअल और कलाकारों का दमदार अभिनय एक बार देखने लायक अनुभव जरूर प्रदान करता है।
