The Odyssey: 4000 का टिकट खरीदकर भी नहीं देख पाएंगे क्रिस्टोफर नोलन की ‘द ओडिसी’, जानें क्या है वजह
The Odyssey Movie 4000 Ticket: हॉलीवुड फिल्ममेकर क्रिस्टोफर नोलन की आने वाली फिल्म द ओडिसी का भारत में भारी क्रेज है, लेकिन देश में असली आईमैक्स स्क्रीन न होने से दर्शकों को पूरा अनुभव नहीं मिल पाएगा।
- Written By: यति सिंह
'द ओडिसी' (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
The Odyssey Christopher Nolan New Movie: दुनियाभर के सिनेमा प्रेमियों के लिए क्रिस्टोफर नोलन एक ऐसा नाम है जो बड़े पर्दे पर जादू रचने के लिए जाना जाता है। नोलन अपनी फिल्मों को केवल मनोरंजन के लिए नहीं बनाते, बल्कि वे दर्शकों को एक अद्भुत दृश्य अनुभव देना चाहते हैं। यही वजह है कि उनकी आने वाली फिल्म द ओडिसी को लेकर भारतीय दर्शकों में भी जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है।
लोग इस फिल्म को दुनिया के सबसे बेहतरीन फिल्म फॉर्मेट यानी आईमैक्स पर देखने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, इस बीच भारतीय दर्शकों के लिए एक ऐसी खबर सामने आई है जो उन्हें थोड़ा निराश कर सकती है। यदि आप भारी-भरकम रकम खर्च करके भी फिल्म ओडिसी को देखने की सोच रहे हैं, तो भी आपको वह असली अनुभव नहीं मिल पाएगा जिसकी कल्पना खुद डायरेक्टर ने की है।
क्यों भारत में फैंस को लगेगा बड़ा झटका
इस निराशा की सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत में जिसे हम आईमैक्स समझकर थियेटर्स में जाते हैं, वह असल में आईमैक्स का मूल रूप नहीं है। क्रिस्टोफर नोलन ने अपनी इस फिल्म को 70 एमएम के असली आईमैक्स कैमरों से फिल्माया है। इस तरह की फिल्मों को पूरी भव्यता के साथ देखने के लिए एक खास तरह के प्रोजेक्टर और बहुत विशाल स्क्रीन की जरूरत होती है।
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लेकिन भारत के किसी भी कमर्शियल सिनेमाघर में इस समय 70 एमएम फिल्म वाला वह असली प्रोजेक्टर सेटअप मौजूद नहीं है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि भारतीय दर्शक फिल्म तो देखेंगे, लेकिन वे उस वास्तविक फ्रेम और विस्तार से महरूम रह जाएंगे जो इस तकनीक की असली ताकत है।
महंगे टिकट के बाद भी क्यों रह जाएगी कमी
मेट्रो सिटी में फिल्मों के शौकीन लोग अक्सर बेहतरीन अनुभव के लिए 3 से 4 हजार रुपये तक की महंगी टिकटें खरीदने से पीछे नहीं हटते हैं। द ओडिसी के लिए भी लोग बड़ी रकम खर्च करने को तैयार बैठे हैं। मगर तकनीकी सीमाओं के कारण मल्टीप्लेक्स संचालक चाहकर भी दर्शकों को वह मूल रूप से दिखाने में असमर्थ हैं।
भारत में जो आईमैक्स स्क्रीन उपलब्ध हैं, वे ज्यादातर डिजिटल या लेजर प्रोजेक्शन पर काम करती हैं। यह तकनीक सामान्य स्क्रीन से तो बहुत बेहतर होती है, लेकिन यह 70MM के पारंपरिक और जादुई आईमैक्स अनुभव की बराबरी कभी नहीं कर सकती। ऐसे में भारी खर्च के बाद भी स्क्रीन का अनुपात छोटा रह जाएगा।
भारत में असली सिनेमाई स्क्रीन का सच
अगर देश में आईमैक्स थिएटर्स की स्थिति पर नजर डालें, तो भारत में इनकी कुल संख्या काफी सीमित है। देशभर में लगभग 30 के करीब आईमैक्स स्क्रीन काम कर रही हैं, जिनमें से ज्यादातर मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में स्थित हैं।
इनमें से भी ज्यादातर स्क्रीन डिजिटल फॉर्मेट वाली हैं जिन्हें फिल्म इंडस्ट्री में मजाक में एलआईमैक्स या नकली आईमैक्स भी कह दिया जाता है। पहले गुजरात के साइंस सिटी में एक 70MM का असली प्रोजेक्टर हुआ करता था, लेकिन समय के साथ वहां भी चीजें बदल गईं। इस तकनीकी कमी के कारण ही भारतीय फैंस को नोलन की सोच का शत-प्रतिशत हिस्सा दिखाई नहीं देगा।
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तकनीक और सिनेमा का यह अनोखा तालमेल
डायरेक्टर क्रिस्टोफर नोलन हमेशा से ही डिजिटल सिनेमा के मुकाबले पारंपरिक फिल्म रील को प्राथमिकता देते आए हैं। उनका मानना है कि जो गहराई और जीवंतता 70 एमएम की फिल्म रील में होती है, वह डिजिटल माध्यम में कभी हासिल नहीं की जा सकती।
द ओडिसी के जरिए उन्होंने एक बार फिर इस विधा को जीवित रखने का प्रयास किया है। दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों में ही वे थिएटर बचे हैं जो इस रील को चला सकते हैं। भारत के दर्शक फिल्म की कहानी और एक्टिंग का पूरा आनंद तो उठा सकेंगे, लेकिन तकनीकी तौर पर वे नोलन के उस संपूर्ण और विशाल कैनवास को देखने से चूक जाएंगे।
