ममता बनर्जी (सोर्स- सोशल मीडिया)
High Margin Victory Seats For TMC: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत सभी बड़े नेता चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक चुके हैं। इस बार की चुनावी लड़ाई में चार ऐसी सीटें चर्चा के केंद्र में हैं, जहां पिछले चुनाव में रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की गई थी इन सीटो में भागाबंगोला, सुजापुर, मालतीपुर और हरिशचंद्रपुर का नाम आता है।
इन चारों सीटों पर पिछले विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भारी बढ़त के साथ जीत हासिल की थी। भागाबंगोला और सुजापुर में उम्मीदवारों ने एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। भागाबंगोला में 68.05%, सुजापुर में 73.44%, हरिशचंद्रपुर में 60.31% और मालतीपुर में 68.02% वोट हासिल कर टीएमसी ने अपना दबदबा दिखाया था। हालांकि, इस बार मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा कड़ा नजर आ रहा है क्योंकि विपक्षी दलों ने भी पूरी ताकत झोंक दी है।
भागाबंगोला सीट से 2021 में तृणमूल कांग्रेस के इदरिस अली ने जीत दर्ज की थी लेकिन इस बार पार्टी ने रैय्यत हुसैन सरकार को मैदान में उतारा है। भारतीय जनता पार्टी ने भास्कर सरकार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि अन्य छोटे दल भी मैदान में हैं। वहीं, सुजापुर सीट पर 2021 में टीएमसी के मोहम्मद अब्दुल घानी ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी। इस बार टीएमसी ने सबीना यास्मीन को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने मोहम्मद अब्दुल हन्नान को मैदान में उतारा है। ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम भी इस सीट पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है, जिससे मुकाबला बहुकोणीय हो गया है। आपको बता दें कि यह दोनों वह सीटें हैं जहां टीएमसी को 1 लाख से ज्यादा वोट मिले थे। हालांकि अब देखना यह दिलचस्प होगा कि यह वोट स्थानिय उम्मीदवारों के चेहरे पर मिले थे या फिर इसके पीछे ममता मैजिक था?
मालतीपुर सीट पर टीएमसी के अब्दुर रहीम बोक्सी ने पिछले चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की थी और इस बार भी वे मैदान में हैं। बीजेपी ने आशीष दास को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस और वामदल भी अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। हरिशचंद्रपुर सीट पर 2021 में टीएमसी के तजमुर हुसैन ने जीत हासिल की थी। इस बार टीएमसी ने मतिबुर रहमान को टिकट दिया है, जबकि बीजेपी से रतन दास और कांग्रेस से मुस्ताक आलम चुनावी मैदान में हैं। यहां भी मुकाबला त्रिकोणीय से बहुकोणीय होता नजर आ रहा है।
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इन चारों सीटों की खास बात यह है कि पिछले चुनाव में जहां टीएमसी पहले स्थान पर रही, वहीं दूसरे स्थान पर अलग-अलग पार्टियां रही थीं। यही वजह है कि इस बार हर सीट पर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। टीएमसी के सामने बीजेपी, कांग्रेस, वामदल और अन्य क्षेत्रीय दल कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन सीटों पर परिणाम न केवल स्थानीय समीकरण तय करेंगे बल्कि राज्य की समग्र चुनावी तस्वीर को भी प्रभावित कर सकते हैं।