पश्चिम बंगाल में आर-पार, एक ही झटके में खाली हो गई ममता की सेना; 91 पार्षदों ने एक साथ दिया इस्तीफा!
Trinamool Congress: नई सरकार के सत्ता संभालते ही TMC शासित नगर निकायों में अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है। कई जगहों पर करोड़ों रुपये के घोटाले और अवैध ठेके के मामले सामने आने वाले हैं।
- Written By: मनोज आर्या
टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Trinamool Congress 91 Councillors Resign: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए बड़ा सियासी संकट गहरा गया है। विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के महज कुछ दिनों बाद पार्टी के 91 पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया। इस घटना से राज्य के विभिन्न नगर निगमों और नगर पालिकाओं में हलचल मच गई है। पश्चिम बंगाल महिला मोर्चा की सोशल मीडिया प्रभारी लक्ष्मी सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस बात का दावा किया है।
उन्होंने बताया कि भाजपा के नेतृत्व वाली नई राज्य सरकार द्वारा नगर निकायों में वित्तीय ऑडिट और भ्रष्टाचार की सख्त जांच शुरू किए जाने के डर से TMC के स्थानीय पार्षद और अध्यक्ष दल बदलने की राह पर चल पड़े हैं। कई पार्षदों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे अब TMC के साथ नहीं रहना चाहते।
एक्स पोस्ट में लक्ष्मी सिंह का दावा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लक्ष्मी सिंह ने लिखा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 91 पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद पार्टी गंभीर राजनीतिक संकट से जूझ रही है। भाजपा के नेतृत्व वाली नई सरकार द्वारा लेखापरीक्षा (ऑडिट) और भ्रष्टाचार की सख्त जांच शुरू होने के डर से कई पार्षद और अध्यक्ष अब दल बदलने लगे हैं। इससे राज्य के विभिन्न नगर निकायों में अराजकता की स्थिति पैदा हो गई है। TMC का नगरपालिका तंत्र तेजी से ढहता जा रहा है और पार्टी का स्थानीय स्तर पर वर्चस्व लगभग समाप्त होने की कगार पर है।
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BREAKING: 91 Trinamool councillors resign across West Bengal as TMC faces a massive political crisis after its crushing Assembly election defeat. Fearing audits and corruption probes by the new BJP-led state government, councillors and chairpersons are jumping ship, leaving civic… — Lakshmi Singh (@LakshmiSinghBJP) May 25, 2026
नगर निकायों में अनियमितताओं की जांच तेज
दरअसल, नई सरकार के सत्ता संभालते ही TMC शासित नगर निकायों में अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, कई जगहों पर करोड़ों रुपये के घोटाले, अवैध ठेके और फर्जी बिलों के मामले सामने आने वाले हैं। इसी आशंका ने TMC के स्थानीय नेताओं में खलबली मचा दी है।
ठप होने की कगार पर प्रशासनिक व्यवस्था
बताया जा रहा है कि 91 पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे से राज्य के कई महत्वपूर्ण नगर निगमों और पालिकाओं में प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गई है। जहां TMC के पास बहुमत था, वहां सदन अब बिना नेता के हो गया है। कई जगहों पर अध्यक्ष पद भी खाली हो गया है। नगर निकाय सूत्रों ने बताया कि अचानक हुए इस सामूहिक इस्तीफे से विकास कार्य ठप हो गए हैं। सफाई, जल आपूर्ति, सड़क निर्माण समेत अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े काम बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
TMC के स्थानीय संगठन का पतन शुरू?
राजनीतिक जानकार इस घटनाक्रम को TMC के स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ वाले नगरपालिका तंत्र के पतन की शुरुआत मान रहे हैं। 2018-2023 के बीच TMC ने ज्यादातर नगर निकायों पर कब्जा जमाया था, लेकिन विधानसभा चुनाव की हार के बाद पार्टी की जड़ें हिलने लगी हैं।
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वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। TMC के भ्रष्टाचार और तानाशाही का हिसाब अब जनता और कानून दोनों कर रहे हैं। ईमानदार पार्षद भाजपा के साथ आ रहे हैं। TMC की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि पार्टी के कुछ नेताओं ने इसे ‘भाजपा की साजिश’ करार देते हुए दावा किया है कि इस्तीफे जबरन दिलवाए जा रहे हैं।
