

Supreme Court Dismissed TMC Petition: टीएमसी ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए याचिका दायर की थी। ये याचिका चुनाव में केंद्र के कर्मियों की नियुक्ति को लेकर थी। ममता बनर्जी के वकील कपिल सिब्बल ने इस मामले में अपना पक्ष रखा, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
कपिल सिब्बल ने 4 बिंदुओं में अपनी बात रखी। सिब्बल का कहना था कि ‘चुनाव आयोग एकतरफा फैसले नहीं ले सकता।" उन्होंने कहा, "हमें आशंका है कि ACEO के आदेश से काउंटिंग में गड़बड़ी होगी।’ इस पर अदालत ने कहा कहा, जानिए-
दरअसल हाल ही में कलकत्ता कोर्ट में ममता बनर्जी की पार्टी ने वोट काउंटिंग में केवल केंद्रीय और पीएसयू कर्मचारियों को सुपरवाइजर बनाने के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल बेंच में जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सुना। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एडिशनल सीईओ के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है।
कपिल सिबल ने कोर्ट के सामने ये चार मुद्दे उठाए।
इसके साथ ही टीएमसी की ओर से कहा गया कि काउंटिंग सुपरवाइजर के तौर पर स्टेट कर्मियों की नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही? संविधान के अनुच्छेद 324 की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और आयोग मनमानी कर रहा है। पार्टी का दावा है कि चुनाव आयोग राज्य कर्मचारियों की नीयत पर सवाल खड़े कर रहा है।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने इस बात पर कहा कि ऐसे आरोप नहीं लगाए जा सकते हैं। कर्मचारी राज्य के हों या केंद्र के, सभी आयोगों के तहत काम कर रहे हैं। ऐसा नहीं हैं कि वहां पर सिर्फ काउंटिंग के सुपरवाइजर होंगे इसके साथ ही वहां के प्रत्याशियों के भी प्रतिनिधियों के साथ-साथ अन्य भी अधिकारी होंगे। ऐसे में किसी की तरह की आशंका का कोई आधार नहीं बनता। इसके साथ ही कोर्ट ने एडिशनल सीईओ के फैसले में दखलंदाजी से इनकार कर दिया।