FY25 में ईडी को बड़ी सफलता! 81,422 करोड़ की संपत्तियों की हुई जब्ती, फिर भी पेंडिंग हैं 2,400 से ज्यादा मामले

ED Report 2026 News: ईडी द्वारा जारी इस नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, अब दोष सिद्धि दर 94% तक पहुंच गई है। फिर भी अभी करीब 2400 से भी ज्यादा के मामले कोर्ट में लंबित हैं।
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ईडी ऑफिस (सोर्स- सोशल मीडिया)
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ED Annual Report 2026 On Economic Offenders: प्रमुख जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देश भर के आर्थिक अपराधियों पर सिकंजा कसते हुए पिछले वित्त वर्ष में 81,422 करोड़ रुपए की संपत्तियों की जब्ती की। कार्रवाई के तहत निवेशकों, घर खरीददारों और बैंकों को 63,142 करोड़ रुपए वापस किए गए। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, अब कई मामलों में मनी ट्रेल के जरिए आर्थिक अपराधियों तक पहंचनें में लगातार सफलता मिल रही है। इस दौरान ईडी ने लाल किला ब्लास्ट केस में की गई कार्रवाई का भी उदाहरण दिया। एजेंसी अब क्रिप्टो, ड्रग्स और साइबर फ्रॉड जैसे मामलों से जुड़े अपराधों पर ध्यान दे रही है।

2400+ मामले अभी भी पेंडिंग

ईडी ने अपने 70वें स्थापना दिवस पर एक साल का रिपोर्ट (ED Report 2026) जारी किया। ईडी द्वारा जारी इस नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, अब दोष सिद्धि दर 94% तक पहुंच गई है। फिर भी अभी करीब 2400 से भी ज्यादा के मामले कोर्ट में लंबित हैं। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई कार्रवाई में उच्च प्रतिशत के ट्रायल कराने के बावजूद कुछ मामले ऐसे हैं जिनका एक छोटा हिस्सा ही अंतिम निर्णय तक पहुंच पाया है। 31 मार्च, 2026 तक कुल दर्ज मामलों में विभिन्न अदालतों द्वारा करीब 60 मामलों का ही पूरी तरह से निपटारा किया गया है।

भगोड़े अपराधियों पर भी शिकंजा

विदेश भागने वाले आर्थिक अपराधियों पर भी ईडी ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत शिकंजा कसा है। ईडी के अनुसार, इस तरह के मामले में 31 मार्च, 2026 तक 54 लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। कार्रवाई में 54 में से 21 अपराधियों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है। इस दौरान एजेंसी द्वारा इन अपराधियों की 2,178 करोड़ रुपए की संपत्ति की जब्त की गई।

7 महीने में 800 मामले दर्ज

नई जोखिम मूल्यांकन समिति के तहत ईडी द्वारा पिछले सात महीने के दौरान देश में विदेशी हस्तक्षेप, डिजिटल अरेस्ट, राष्ट्रीय हित के खिलाफ पैरवी और बौद्धिक संपदा से जुड़े धोखाधड़ी जैसे उभरते खतरों के मामलों में 800 मामले दर्ज किए गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक राहुल नवीन के मुताबिक अक्टूबर 2025 से लेकर अब तक इस समिति की 91 बैठकें की गई। इसमें 794 मामले दर्ज किए जाने की मंजूरी दी गई।

प्रवर्तन निदेशालय की स्थापना 1 मई 1956 को हुई थी। देश में वित्तीय अपराधों से लड़ाई के साथ-साथ आर्थिक रूप से देश को मजबूत करने के उद्देश्य से इस एजेंसी की स्थापना की गई थी। अपनी स्थापना के बाद से एजेंसी ने कार्रवाई करते हुए अब तक करीब 2.36 लाख करोड़ रुपए की अवैध संपत्तियां जब्त की है।

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