

Nagpur Government Employee Case: नागपुर न्यायालय और ट्रिब्यूनल के समक्ष एक बेहद अहम मामले में जाति दावा अमान्य होने के कारण कर्मचारी को अपनी सेवानिवृत्ति से मात्र 15 दिन पहले एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। ट्रिब्यूनल ने कर्मचारी की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि अवैध नियुक्ति के मामलों में किसी भी प्रकार के वैधानिक संरक्षण या सेवानिवृत्ति लाभों की मांग नहीं की जा सकती। संबंधित कर्मचारी 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त होने वाला था।
उसे अपनी नौकरी से बर्खास्तगी का कारण बताओ नोटिस 16 मई 2023 को जारी किया गया था। उस समय स्टे ऑर्डर के चलते कर्मचारी अपनी सेवा में बना रहा लेकिन रिटायरमेंट से ठीक 15 दिन पहले जब यह मामला सुनवाई के लिए आया तो ट्रिब्यूनल ने माना कि मामले का लंबित रहना (2023 से) कोई मायने नहीं रखता क्योंकि कार्रवाई 2023 में ही शुरू हो गई थी।
ट्रिब्यूनल का कड़ा रुख कर्मचारी की ओर से यह तर्क दिया गया था कि रिटायरमेंट के इतने करीब आकर उससे उसके सेवानिवृत्ति लाभ (जैसे पेंशन और ग्रेच्युटी) नहीं छीने जा सकते, हालांकि ट्रिब्यूनल ने इस दलील को खारिज कर दिया।
फैसले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों (जगदीश मामले में) का हवाला देते हुए कहा गया कि राज्य सरकार की ऐसी कोई नीति नहीं है जो उन NTB कर्मचारियों को संरक्षण प्रदान करे जिनके जाति प्रमाणपत्र अमान्य घोषित हो चुके हैं। इसके साथ ही 'एक्ट ऑफ 2000' की धारा 10 यह अनिवार्य करती है कि ऐसी परिस्थितियों में कर्मचारी को दिए गए सभी लाभ वापस लिए जाएं।
संविधान के अनुच्छेद 15 का उल्लंघन: कर्मचारी के वकील ने अदालत में राज्य सरकार पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 15 (धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध) का हवाला देते हुए अदालत का ध्यान कुछ हालिया सरकारी प्रस्तावों (GR) की ओर खींचा।
वकील ने दलील दी कि राज्य सरकार ने SEBC और OBC श्रेणी के उम्मीदवारों को जाति वैधता प्रमाणपत्र जमा करने के लिए 6 महीने का अतिरिक्त समय दिया है लेकिन ST या अन्य श्रेणियों के साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है। अदालत ने भी इस बिंदु पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह समझना मुश्किल है कि राज्य सरकार इस मामले में अनुसूचित जनजातियों और अन्य के साथ अलग तरह का व्यवहार क्यों कर रही है।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि चूंकि मामला अभी लंबित है, इसलिए केबल रिटायरमेंट के आधार पर प्रक्रिया पर रोक लगा देने से भी कर्मचारी को रोके गए सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त करने में कोई मदद नहीं मिलेगी- मामले की अगली सुनवाई अब अदालती छुट्टियों के बाद तय की गई है।