ममता से टक्कर लेने वाला वो अफसर जो अब सुवेंदु का सबसे बड़े सिपाही बन गया, कौन हैं सुब्रत गुप्ता?
Suvendu Adhikari IAS Advisor: बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी टीम तैयार करना शुरू कर दिया है। रिटायर आईएएस अफसर सुब्रत गुप्ता को मुख्यमंत्री का प्रमुख सलाहकार नियुक्त किया गया है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
सुवेंदु अधिकारी और सुब्रत गुप्ता, फोटो- सोशल मीडिया
Subrata Gupta IAS Advisor: पश्चिम बंगाल की सत्ता में हुए ऐतिहासिक बदलाव के बाद अब प्रशासनिक गलियारों में भी बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही शुभेंदु अधिकारी ने अपनी कोर टीम का गठन शुरू कर दिया है और इस सूची में सबसे पहला और सबसे चर्चित नाम सुब्रत गुप्ता का है।
पश्चिम बंगाल कैडर के 1990 बैच के इस अधिकारी की नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक लंबी राजनीतिक और पेशेवर कहानी छिपी हुई है। सुब्रत गुप्ता की छवि एक ऐसे सख्त और ईमानदार अधिकारी की रही है जिसने अपनी कार्यशैली से पिछली सरकार के लिए कई बार मुश्किलें खड़ी की थीं। अब वे नए मुख्यमंत्री के रणनीतिक सलाहकार के रूप में राज्य की नई प्रशासनिक व्यवस्था की नींव रखने जा रहे हैं।
बंगाल के नए प्रशासनिक ढांचे का मास्टरमाइंड कौन
पश्चिम बंगाल के ही रहने वाले सुब्रत गुप्ता का पूरा जीवन शिक्षा और अनुशासन की एक मिसाल रहा है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई के बाद देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी खड़गपुर से डिग्री हासिल की और फिर लंदन से एमबीए कर अपनी विशेषज्ञता को और भी निखारा। 1990 में आईएएस बनने के बाद उन्होंने अपने 35 साल के लंबे करियर में कुल 27 अलग-अलग विभागों की कमान संभाली है।
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वे बर्धमान और जलपाईगुड़ी जैसे महत्वपूर्ण जिलों के जिलाधिकारी रहे हैं जहाँ उन्होंने जमीनी स्तर पर जनता की समस्याओं को बहुत करीब से देखा है। उनकी इसी समझ और अनुभव को देखते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें अपना सलाहकार चुना है ताकि राज्य में सुशासन और प्रशासनिक सुधारों को तेजी से लागू किया जा सके।
ममता सरकार से तकरार और अब सुवेंदु के सारथी
सुब्रत गुप्ता का नाता विवादों से तब जुड़ा जब वे कोलकाता मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक थे। उनके नेतृत्व में ही देश की पहली अंडर वाटर मेट्रो परियोजना की नींव रखी गई थी जो आज कोलकाता की शान मानी जाती है। हालांकि चर्चा यह भी रही कि उस दौरान उन्हें राज्य सरकार से उतना सहयोग नहीं मिला जितना एक बड़ी परियोजना के लिए मिलना चाहिए था।
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इतना ही नहीं वाम मोर्चा सरकार के समय उन्होंने पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम के प्रमुख के रूप में सिंगूर में नैनो कार परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण में भी अहम भूमिका निभाई थी। पिछले कुछ सालों में उन्हें बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण जैसे कम चर्चा वाले विभागों में भेज दिया गया था जिसे कई लोग उनकी उपेक्षा के तौर पर देखते थे। आज वही अफसर मुख्यमंत्री के सबसे भरोसेमंद सलाहकार के रूप में सत्ता के केंद्र में लौट आया है।
आईआईटी से लंदन तक सुब्रत का शानदार सफरनामा
अधिकारियों का मानना है कि सुब्रत गुप्ता का विजन बंगाल को बदलने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। केंद्र सरकार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव के रूप में काम करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की नीतियों पर अपनी छाप छोड़ी है। उनकी सेवानिवृत्ति मई 2025 में हुई थी और उसके बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि उनका अनुभव किसी बड़ी जिम्मेदारी में इस्तेमाल किया जाएगा।
सुब्रत गुप्ता केवल फाइलों के अधिकारी नहीं हैं बल्कि वे तकनीकी और प्रबंधन के भी माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं। एक ऐसे राज्य में जहां उद्योग और रोजगार को लेकर चुनौतियां खड़ी हैं वहां उनके जैसा प्रोफेशनल अफसर मुख्यमंत्री के लिए एक मजबूत ढाल साबित हो सकता है जो नौकरशाही के पेच को अच्छी तरह समझता है।
