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महाराष्ट्र चुनाव: मेनिफेस्टों में फिर हुईं नौकरियों की बरसात, पिछले कितने वादे हुए पूरे? डालें एक नजर

युवाओं को लुभाने के लिए इस बार फिर महायुति और महा विकास अघाड़ी में शामिल पार्टियां, रोजगार और नौकरियां अब सभी का प्रमुख एजेंडा है। लेकिन 2019 में कितने ही वादे पुरे हुए। इनमें नौकरियों को लेकर किए वादों पर एक नजर।

  • By राहुल गोस्वामी
Updated On: Nov 12, 2024 | 09:22 AM

महाराष्ट्र चुनाव

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मुंबई : महाराष्ट्र में जहां चुनावी पारी अपने उफान पर है। वहीं युवाओं को लुभाने के लिए महायुति और महा विकास अघाड़ी में शामिल पार्टियां, रोजगार और नौकरियां अब सभी का प्रमुख एजेंडा है। जी हां, महाराष्ट्र में हो रहे विधानसभा चुनावों में महायुति के अग्रणी दल BJP ने बड़े पैमाने पर रोजगार के संकल्प लिए हैं। यहां BJP और उसके सहयोगी दल इस वादे को अपना संकल्प बता रहे तो महा विकास अघाड़ी की कांग्रेस और सहयोगी पार्टियां भी इसे ‘गारंटी’ कह रही हैं।

अब तक महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए महायुति और महा विकास अघाड़ी इन दोनों ने ही अपने घोषणापत्र जारी कर दिए हैं। इन दोनों के घोषणापत्र को देखें तो दूसरे आकर्षक और अनेक लोकलुभावन वादों के अलावा रोजगारी और नौकरी पर खास पर भी फोकस कर रखा है।

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जहां BJP के नेतृत्व वाले महायुति ने 25 लाख नौकरियों के अवसर बनाने का संकल्प लिया है। वहीं इसके अलावा शिवाजी महाराज आकांक्षा केंद्र भी बनेंगे। इसमें आने वाले 5 सालों में 10 लाख नए उद्यमी तैयार करने की बात है। इसके साथ ही BJP ने 10 लाख छात्रों को हर महीने 10 हजार रुपए ट्यूशन फी देने का भी बड़ा वादा किया है।

वहीं दूसरी ओर महा विकास अघाड़ी (MVA) ने भी इक कदम आगे बढ़ते हुए सरकारी नौकरियों में ढाई लाख रिक्त पद भरने की भी गारंटी दी है। हालांकि कांट्रैक्ट पर नियुक्तियों की परंपरा अब MVA बंद करने की बात कह रहा है। अब यह सारी ही नियुक्तियां महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के जरिए होंगी। इसके साथ ही बेरोजगारों को हर महीने चार हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने की गारंटी भी महा विकास अघाड़ी ने अपने घोषणापत्र में कर रखी हैं।

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हां यह जरुर है कि, महाराष्ट्र में महायुति और महाविकास आघाडी ने विधानसभा चुनाव-2024 के लिए मैनिफेस्टो तो जारी कर दिए हैं। इस बार भी फिर से अगले 5 सालों के लिए वादे किए गए हैं। ऐसे में, थोड़ा पिछे चलकर, बीते 2019 चुनावों के घोषणापत्र देखें तों नौकरी के उन बड़े- बड़े वादों की कुछ और ही हकीकत सामने आती है।

बीते 2019 में शिवसेना एक थी, NCP भी एक थी। कांग्रेस और एनसीपी का तब गठबंधन था, तो शिवसेना और बीजेपी का गठजोड़ था। देखा जाए, तो सभी पार्टियों ने राज्य की सत्ता में ढाई-ढाई साल राज किया। लेकिन कितने ही वादे पुरे हुए। इनमें नौकरियों को लेकर किए वादों पर एक नजर –

शिवसेना (अविभाजित) का घोषणा पत्र

शिवसेना ने साल 2019 में किसानों की कर्ज माफी और उन्हें कर्जमुक्त करने के लिए सालाना 10 हजार रुपये के भुगतान का वादा किया था। तब उद्धव ठाकरे ढाई साल तक राज्य के CM रहे और उन्होंने कई वादे पूरे करने की कोशिश की। कुछ कोरोना संकट के कारण आधे-अधूरे रहे । इसके बाद पार्टी में बगावत हुई और उनकी सरकार ही चली गई।

  • घोषणा पत्र में वादा:स्थानीय लोगों को नौकरी में आरक्षण मुहैया कराना।
  • जमीनी हकीकतः लागू करने की घोषणा जरुर हुई, लेकिन यह कहां तक पहुंची इसका कोई आंकड़ा अब तक नहीं है।

BJP का घोषणा पत्र

साल 2019 में BJPने तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में अर्थव्यवस्था और महाराष्ट्र को वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी, 5 साल में एक लाख नौकरियां देने का वादा तो किया था। हालांकि, ढाई साल सत्ता में रहने के बाद भी BJP के वादे पूरे नहीं हुए । अब राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि, वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लिए महाराष्ट्र को फिलहाल 2030 तक का इंतजार करना पड़ेगा।

  • घोषणा पत्र में वादा: कौशल विकास को बढ़ावा देना।
  • जमीनी हकीकतः इस दिशा में काम तो हुआ। कौशल विकास यूनिवर्सिटी की भी स्थापना की गई ।
  • घोषणा पत्र में वादा: महाराष्ट्र को 1 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी और 5 साल में एक लाख नौकरियों का वादा।
  • जमीनी हकीकतः अब तक दोनों ही अधूरे, इस लक्ष्य को हासिल करने में अभी समय हैं।

कांग्रेस-NCP(अविभाजित) का घोषणा पत्र

2019 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अविभाजित) और कांग्रेस गठबंधन ने संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया था। इसमें किसानों, बेरोजगार युवाओं, विद्यार्थियों और स्थानीय रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया गया था । तब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में बनी MVA सरकार में कांग्रेस-एनसीपी दोनों UR प्रमुख घटक थे।

  • घोषणा पत्र में वादा: बेरोजगार युवाओं को 5,000 मासिक भत्ता।
  • जमीनी हकीकतः ढाई साल के शासन में ऐसा कोई भत्ता युवाओं नसीब नही हुआ ।
  • घोषणा पत्र में वादा: मराठी भाषा के लिए स्वतंत्र विश्वविद्यालय होंगे स्थापित।
  • जमीनी हकीकतः यह वादा भी अधुरा।
  • घोषणा पत्र में वादा: उच्च शिक्षा के लिए ‘0’ ब्याज दर पर शिक्षा ऋण उपलब्ध कराना।
  • जमीनी हकीकतः कोशिश तो हुई, लेकिन कितने विद्यार्थियों को लाभ मिला इसका कोई आंकड़ा नहीं।

देखा जाए तो एस तरह चुनाव आते ही वादों की बौछारें शुरू होतीं हैं। हर पार्टी ही अपना अपने मैनिफेस्टो जारी करती है। इसमें रोजगार से लेकर किसानों की कर्ज माफी और महिला सुरक्षा तक, हर वर्ग को खुश करने की कोशिश भी की जाती है। लेकिन इसके उलट इनके पुरा होने की गारंटी पर कोई काम नही होता, कम से कम आंकड़े तो यही कहते हैं।

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Published On: Nov 12, 2024 | 09:08 AM

Topics:  

  • Maharashtra Assembly Elections

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