महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव: गड़चिरोली में विजयी होने के लिए निर्दलीयों का सहारा, तीन सीटों पर मैदान में 13 निर्दलीय
गडचिरोली में पार्टी की तरफ से ताल ठोंक रहे उम्मीदवार निर्दलीयों के सहारे चुनावी खेल खेलने की कोशिश कर रहे हैं। कहा यह भी जा रहा है कि सब अपनी सुविधानुसार निर्दलीय उम्मीदवारों को वित्तीय मदद भी कर रहे हैं।
- Written By: अभिषेक सिंह
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-सोशल मीडिया)
गड़चिरोली: प्रमुख राजनीतिक दल के उम्मीदवार को पराजित करने के लिये विरोधियों ने निर्दलीयों का खेल रचा हैं। उन्हें वित्तीय सहायता देकर प्रतिद्वंदी उम्मीदवार द्वारा विजय के लिये खेला गया यह खेल प्रमुख उम्मीदवारों के लिये सिरदर्द साबित हो रहा है। गडचिरोली, आरमोरी और अहेरी तीनों विस क्षेत्र में कुल 13 निर्दलीय उम्मीदवार है।
इन निर्दलीय उम्मीदवारों में आनंदराव गेडाम, शिलू चिमूरकर, खेमराज नेवारे, दिवाकर पेंदाम, बालकृष्ण सावसाकडे, डॉ. सोनल चेतन कोवे, दिपक आत्राम, महेश कुमरम, शैलेश गेडाम, नितीन पदा, राजे अम्ब्रीशराव आत्राम, भाग्यश्री लेखामी, हनमंतु मड़ावी आदि का समावेश है।
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अहेरी विस क्षेत्र में महायुति के उम्मीदवार डॉ. धर्मरावबाबा आत्राम, महाविकास आघाड़ी की उम्मीदवार भाग्यश्री आत्राम, निर्दलीय राजे अम्ब्रीशराव आत्राम और हनुमंतु मड़ावी चार उम्मीदवारों के बीच चुनावी लड़ाई होने वाली है। वहीं गड़चिरोली विस क्षेत्र में महायुति के उम्मीदवार डॉ. मिलिंद नरोटे और महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार मनोहर पाटिल पोरेटी के बीच सीधी टक्कर है।
यही स्थिति आरमोरी विस क्षेत्र में दिखाई दे रही है। यहां पर भाजपा के उम्मीदवार कृष्णा गजबे का कांग्रेस के उम्मीदवार रामदास मसराम के साथ मुकाबला होगा। अहेरी विस क्षेत्र छोडे तो अन्य दो विस क्षेत्र में निर्दलीयों का अच्छा प्रभाव नहीं है। लेकिन प्रतिद्वंदी उम्मीदवार को धूल चटाने के लिये विरोधी कुछ निर्दलीयों को अपनी ढाल बनाने की चर्चा है। उन्हें खोके देकर मतदान पर प्रभाव डालने का प्रयास किया जा रहा है। प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के वोटो का विभाजन करने के लिये विरोधियों द्वारा विभिन्न तरह के फंडे अपनाएं जा रहे है।
कुछ उम्मीदवारों ने उम्मीदवारी मिलने के पहले ही जनसंपर्क पर काफी खर्च किया था। लेकिन इनमें से अनेकों को अधिकृत उम्मीदवारी नहीं मिलने से उन्होंने बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया। उनके नाराजगी का लाभ लेते हुए विरोधी उन्हें वित्तीय रसद पहुंचाकर प्रचार के लिये मदद किए जाने से प्रमुख उम्मीदवारों का सिरदर्द बढ़ गया है।
नाराजगी से किसका होगा नुकसान
भाजपा के विधायक डॉ. देवराव होली, पूर्व विधायक डॉ. नामदेव उसेंडी, कांग्रेस के एड. विश्वजित कोवासे को पार्टी ने उम्मीदवारी नहीं दी। जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय के रूप में नामांकन दाखिल किया था। लेकिन कार्रवाई के भय से अपना नामांकन वापस लेने के बाद भी उनमें पार्टी की भूमिका के प्रति नाराजगी दिखाई दे रही है।
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कहा जा रहा है कि कोवासे उम्मीदवार के प्रचार के लिये घुमते नजर आ रहे है, लेकिन अपना राजनीतिक प्रतिद्वंदी चुनकर आने पर भविष्य में बाधा बन सकता है, इसके चलते अनेकों ने विरोधी का काम करने की चर्चा है। वरिष्ठों के आदेश के चलते प्रचार के लिये घुमने के बाद भी एकनिष्ठा से काम करते हुए नहीं दिखाई दे रहे है। जिससे उनके नाराजगी का किसे नुकसान होगा, यह नतीजे के बाद पता चल पाया जाएगा।
