एक्टिंग से संसद की दहलीज तक, कौन हैं टीएमसी से नाता तोड़कर भाजपा का बड़ा चेहरा बनने वाली लॉकेट चटर्जी?
Locket Chatterjee Profile: अभिनेत्री से नेता बनीं लॉकेट चटर्जी का राजनीतिक सफर बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है। हुगली की हार के बाद अब उनके भविष्य और सियासी संघर्ष पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
लॉकेट चटर्जी, फोटो- सोशल मीडिया
West Bengal Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल में ग्लैमर और पॉलिटिक्स का संगम अक्सर देखने को मिलता है। इसी फेहरिस्त में एक बड़ा नाम लॉकेट चटर्जी का आता है, जिन्होंने अपनी अदाकारी के जादू के बाद राजनीति के अखाड़े में कदम रखा।
दक्षिणेश्वर के मंदिर की घंटियों के बीच पली-बढ़ी लॉकेट का जीवन किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रहा है। लेकिन 2024 के चुनावी नतीजों ने उनके राजनीतिक भविष्य के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब चर्चा इस बात की है कि क्या वह फिर से अपनी पकड़ मजबूत कर पाएंगी या यह उनकी सियासी पारी का सबसे कठिन दौर साबित होगा।
मंदिर की गलियों से टॉलीवुड के बड़े पर्दे तक का सफर
लॉकेट चटर्जी का जन्म 4 दिसंबर 1974 को पश्चिम बंगाल के दक्षिणेश्वर में हुआ था। उनके पिता अनिल चटर्जी और उनके दादा प्रसिद्ध दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पुजारी के रूप में अपनी सेवाएं देते थे। बचपन से ही उनका झुकाव कला और नृत्य की ओर रहा, जिसे उनकी मां ने भरपूर प्रोत्साहन दिया। उन्होंने भरतनाट्यम, कथकली और मणिपुरी जैसी शास्त्रीय नृत्य विधाओं में प्रशिक्षण लिया है। उन्होंने विज्ञान में स्नातक की डिग्री भी हासिल की है। अभिनय की दुनिया में कदम रखते ही उन्होंने टॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई और कई लोकप्रिय फिल्मों तथा टीवी सीरियल्स में काम किया।
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टीएमसी से नाता तोड़कर कैसे बनीं भाजपा का बड़ा चेहरा
लॉकेट चटर्जी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत तृणमूल कांग्रेस के साथ की थी। हालांकि साल 2015 में उन्होंने एक बड़ा फैसला लेते हुए टीएमसी का साथ छोड़ दिया और भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। उनका मानना था कि वे वहां घुटन महसूस कर रही थीं और उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर नहीं मिल रहा था।
भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी सक्रियता और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें जल्द ही पार्टी का एक महत्वपूर्ण चेहरा बना दिया। साल 2017 में उन्हें रूपा गांगुली की जगह पश्चिम बंगाल भाजपा महिला मोर्चा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इसके बाद जून 2020 में वे प्रदेश भाजपा की महासचिव पद पर आसीन हुईं। उनके राजनीतिक कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें बंगाल में भाजपा के सबसे भरोसेमंद और आक्रामक चेहरों में गिना जाने लगा।
हुगली की वो ऐतिहासिक जीत और फिर हार
साल 2019 के लोकसभा चुनावों ने लॉकेट चटर्जी के करियर को एक नई ऊंचाई प्रदान की। उन्होंने हुगली संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ते हुए रत्ना दे को बड़े अंतर से शिकस्त दी और संसद की दहलीज पार की। सांसद के तौर पर उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी और महिला सशक्तिकरण जैसी महत्वपूर्ण संसदीय समितियों में सक्रिय सदस्य के रूप में काम किया।
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हालांकि इसके बाद का चुनावी सफर उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्हें चुचुड़ा सीट से हार का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ा राजनीतिक झटका उन्हें 2024 के आम चुनाव में लगा जब उन्हें अपनी ही पुरानी सहयोगी और चुनावी राजनीति में नई अभिनेत्री रचना बनर्जी ने हरा दिया। रचना बनर्जी ने उन्हें लगभग 76,853 वोटों के बड़े अंतर से मात दी, जिसने भाजपा खेमे में हलचल मचा दी।
