प्रतीक जैन, फोटो- नवभारत
West Bengal Election 2026: एक तरफ जहां पश्चिम बंगाल में चुनावी पारा चरम पर है तो वहीं दूसरी ओर इसी बीच केंद्रीय जांच एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता ने राज्य के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनावी बिसात बिछाने वाली संस्था आई-पैक के प्रतीक जैन अब ईडी कड़ी कार्रवाई के मूड में हैं।
कथित कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले के जांच की आंच केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब यह प्रतीक जैन के घर के भीतर तक जा पहुंची है। चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही इस तरह की कानूनी कार्यवाही ने सत्ता में बैठी पार्टी और केंद्र के बीच की जुबानी जंग को और भी धार दे दिया है।
ईडी ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए आई-पैक के निदेशक प्रतीक जैन के परिवार के सदस्यों को औपचारिक रूप से पूछताछ के लिए बुलाया है। प्रतीक जैन की पत्नी बार्बी जैन और उनके भाई पुलकित जैन को 15 अप्रैल को राजधानी दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
यह समन ऐसे समय में भेजा गया है जब बंगाल में वोटिंग शुरू होने में महज आठ दिनों का समय बचा है। जांच एजेंसी को शक है कि परिवार के इन सदस्यों के पास कथित हवाला लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी कुछ ऐसी जानकारियां हो सकती हैं जो इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर सकें।
इस पूरे प्रकरण की जड़ें पश्चिम बंगाल और झारखंड में फैले करोड़ों रुपये के कोयला तस्करी घोटाले से जुड़ी हुई हैं। ईडी का दावा है कि इस जांच के दौरान अब तक लगभग 50 करोड़ रुपये की ऐसी राशि का पता चला है जो अपराध के जरिए कमाई गई है। जांच अधिकारियों के अनुसार, आई-पैक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के वित्तीय लेन-देन में कई अनियमितताएं पाई गई हैं। इसमें बिना किसी ठोस आधार के असुरक्षित लोन लेना और फर्जी चालान के जरिए फंड जुटाना शामिल है।
एजेंसी का आरोप है कि संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय लेनदेन और हवाला चैनलों का उपयोग करके बड़ी मात्रा में नकदी को इधर-उधर किया गया है। इस मामले में 13 अप्रैल को कंपनी के एक और सह-संस्थापक विनेश चंदेल को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जो वर्तमान में दस दिनों की रिमांड पर हैं।
जांच की यह कहानी केवल हालिया समन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक लंबा और विवादास्पद इतिहास रहा है। इसी साल जनवरी महीने में जब ईडी की टीमें कोलकाता के सॉल्ट लेक वाले आई-पैक ऑफिस और प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी कर रही थीं, तब ममता बनर्जी स्वयं अपने वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गई थीं। आरोप है कि उनके आने के बाद जांच में रुकावट आई।
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इस घटना को लेकर ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की थी, जिसमें राज्य प्रशासन पर जांच में रोड़ा अटकाने का आरोप लगाया गया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस मामले की सुनवाई को फिलहाल अनिश्चित काल के लिए टाल दिया है।
तृणमूल कांग्रेस ने इस पूरी कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित और विपक्षी दलों को परेशान करने की साजिश करार दिया है। पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है और चुनावी समय में की जा रही इन गिरफ्तारियों की टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं। टीएमसी का मानना है कि यह निष्पक्ष चुनाव के लोकतांत्रिक विचार को कमजोर करने का एक प्रयास है।
वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसी का कहना है कि उनकी हर कार्रवाई पूरी तरह से कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। बंगाल की राजनीति के इस महत्वपूर्ण मोड़ पर यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच का यह नया रुख आने वाले चुनाव परिणामों पर क्या और कैसा असर डालता है। फिलहाल, दिल्ली में होने वाली इस पूछताछ पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।