बिहार विधानसभा चुनाव 2025: उजियारपुर में फिर राजद की परीक्षा, भाजपा और जन सुराज से त्रिकोणीय मुकाबले

Bihar Assembly Election 2025: उजियारपुर विधानसभा सीट, राजनीतिक रूप से सक्रिय, राजद का गढ़ बनी हुई है; 2020 में आलोक मेहता ने भाजपा प्रत्याशी को भारी अंतर से हराकर पार्टी की पकड़ मजबूत की।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025: उजियारपुर में फिर राजद की परीक्षा, भाजपा और जन सुराज से त्रिकोणीय मुकाबले
उजियारपुर विधानसभा सीट (सोर्स- डिजाइन)
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Ujiarpur Assembly Constituency: बिहार के समस्तीपुर जिले की उजियारपुर विधानसभा सीट 2025 के चुनाव में एक बार फिर राजनीतिक विश्लेषण का केंद्र बन गई है। दलसिंहसराय अनुमंडल का यह प्रमुख प्रखंड मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा है, लेकिन जब बात राजनीति की आती है, तो यह क्षेत्र एक उलझी हुई पहेली बन जाता है, जहां विधानसभा और लोकसभा चुनावों में मतदाताओं का रुख एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होता है।

राजनीतिक रूप से सक्रिय सीट

उजियारपुर विधानसभा क्षेत्र का गठन 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद हुआ। यह सीट भले ही नई हो, लेकिन यहां की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने शुरुआत से ही प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों में मतदाताओं ने लगातार राजद पर भरोसा जताया है, जिससे पार्टी का जनाधार मजबूत बना हुआ है।

राजद की लगातार जीत और उम्मीदवारों की भूमिका

इस सीट के पहले चुनाव में राजद के दुर्गा प्रसाद सिंह ने जदयू के राम लखन महतो को हराकर जीत हासिल की। इसके बाद आलोक कुमार मेहता ने पार्टी की पकड़ और मजबूत की। 2020 के चुनाव में उन्होंने भाजपा के शील कुमार रॉय को भारी अंतर से पराजित किया। उस चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा, मायावती और ओवैसी के गठबंधन ने प्रशांत पंकज को उतारा था, लेकिन उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।

जातीय समीकरणों का गहरा असर

उजियारपुर विधानसभा की राजनीति में जातिगत समीकरणों की भूमिका बेहद अहम रही है। यादव और कुशवाहा समुदाय यहां प्रभावशाली हैं, लेकिन ब्राह्मण और राजपूत मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। अनुसूचित जाति की भागीदारी करीब 19 प्रतिशत और मुस्लिम मतदाता लगभग 10 प्रतिशत हैं। शहरी मतदाता केवल 5.34 प्रतिशत हैं, जिससे ग्रामीण मुद्दे चुनावी विमर्श में प्रमुखता से शामिल रहते हैं।

लोकसभा में भाजपा का वर्चस्व

उजियारपुर विधानसभा क्षेत्र उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यहां की सबसे दिलचस्प बात यह है कि विधानसभा में जहां राजद को समर्थन मिलता है, वहीं लोकसभा चुनावों में भाजपा को वरीयता दी जाती है। 2014 से लेकर 2024 तक भाजपा के उम्मीदवारों ने यहां लगातार जीत दर्ज की है। 2024 में नित्यानंद राय ने राजद के आलोक कुमार मेहता को बड़े अंतर से हराकर सांसद पद हासिल किया।

भौगोलिक और आर्थिक परिदृश्य

यह सीट दलसिंहसराय मुख्यालय से 14 किमी और समस्तीपुर जिला मुख्यालय से 15 किमी दूर है। पटनाब से इसकी दूरी लगभग 95 किमी है। यहां की आजीविका मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है, जबकि हथकरघा उद्योग जैसे छोटे उद्यम भी स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं। उजियारपुर प्रखंड के साथ-साथ दलसिंहसराय की 10 ग्राम पंचायतें और अधिसूचित क्षेत्र इस विधानसभा क्षेत्र में शामिल हैं।

2025 का चुनावी परिदृश्य

2025 के विधानसभा चुनाव में राजद की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, लेकिन भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन भी इस सीट पर अपनी रणनीति के साथ मैदान में है। इस बार जन सुराज पार्टी ने भी दुर्गा प्रसाद सिंह को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। ऐसे में राजद, जदयू और जन सुराज के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिल सकता है।

मतदान की तारीखें और संभावनाएं

इस बार बिहार में दो चरणों में मतदान होना है। पहले चरण के लिए 6 नवंबर और दूसरे चरण के लिए 11 नवंबर को वोटिंग होगी। नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। उजियारपुर की राजनीतिक उलझन और मतदाताओं की दोहरी प्राथमिकता इस बार भी चुनावी विश्लेषकों के लिए एक चुनौती बनी रहेगी।

उजियारपुर विधानसभा सीट पर यह चुनाव न केवल दलों की ताकत की परीक्षा है, बल्कि मतदाताओं की सोच और बदलते राजनीतिक समीकरणों का भी प्रतिबिंब होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राजद अपनी जीत की परंपरा को कायम रख पाएगा या कोई नया समीकरण इस सीट की दिशा बदल देगा।

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