हुमायूं कबीर से अजमल और ओवैसी तक…पांच राज्यों के चुनाव में नहीं चला मुस्लिम कार्ड, जनता ने चटाया धूल
Assembly Election Results 2026: विधानसभा चुनाव के नतीजों की बात करें तो बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा की सरकार बनती दिख रही है। वहीं तमिलनाडु में थलापति विजय की TVK पहली बार सरकार बनाते दिख रही है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
हुमायूं कबीर, अजमल और ओवैसी (Image- Social Media)
Muslim Parties in Assembly Election Results 2026: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों की बात करें तो बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा की सरकार बनती दिख रही है। वहीं तमिलनाडु में डीएमके-एआईडीएमके खिलाफ उलटफेर करते हुए थलापति विजय की टीवीके पहली बार में ही सरकार बनाते हुए दिख रही है। केरल विधानसभा चुनाव नतीजे कांग्रेस को राहत देने वाले हैं। केरल में कांग्रेस की अगुवाई वाला यूडीएफ लेफ्ट गठबंधन एलडीएफ को सत्ता से हटाकर सरकार में वापसी कर रहा है।
इस चुनाव की सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार न तो मुस्लिम कार्ड चला और न ही मुस्लिम महारथी चुनाव में कुछ खास कर पाए। असम में बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ, तो वहीं बंगाल में हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी, पीरजादा अब्बास सिद्दीकी का इंडियन सेकुलर फ्रंट, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ये सभी पार्टियां कोई कमाल नहीं कर पाईं।
हुमायूं कबीर का नहीं चला जादू
बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निकाले गए विधायक हुमायूं कबीर ने पिछले साल अक्टूबर में अपनी नई पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) बनाई थी। हुमायूं कबीर ने राज्य की 115 सीटों पर चुनाव लड़ा। हुमायूं कबीर खुद मुर्शिदाबाद जिले की दो सीटों रेजीनगर (Rejinagar) और नोआदा (Noada) से चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। लेकिन हुमायूं कबीर की पार्टी फिलहाल किसी भी सीट पर आगे नहीं है।
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हुमायूं कबीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
बता दें कि हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा इलाके में बाबरी मस्जिद की नींव भी रखी थी, जिसको लेकर काफी सियासी बवाल मचा था। हालांकि भाजपा को हराने के लिए मुस्लिम वोटों ने ज्यादातर ममता बनर्जी की ओर रुख किया।
पीरजादा का सेकुलर फ्रंट भी नहीं आया काम
पीरजादा नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व में बना इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) ने भी बंगाल विधानसभा चुनावों में कुल 120 सीटों पर चुनाव लड़ा था। आईएसएफ 33 सीटों पर लेफ्ट के साथ गठबंधन में लड़ रही थी। लेकिन वाम मोर्चा के साथ आईएसएफ को भी धूल चाटनी पड़ी। नौशाद सिद्दीकी खुद भांगड़ विधानसभा सीट से पीछे चल रहे हैं। भांगड़ में टीएमसी के दिग्गज नेता शौकत मोल्ला आगे हैं।
बदरुद्दीन अजमल भी हुए नाकाम
असम की सियासत में कभी किंगमेकर कहे जाने वाले बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF इस बार की बुरी हार रही है। AIUDF इस बार 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी और कांग्रेस से गठबंधन नहीं था। लेकिन एआईयूडीएफ केवल 2 सीटों पर ही आगे है।
बदरुद्दीन अजमल( इमेज-सोशल मीडिया)
अजमल खुद बिन्नाकांडी (Binnakandi) से आगे चल रहे हैं। लेकिन वो 14 सीटों के घाटे में चल रही है। एआईयूडीएफ और कांग्रेस के बीच 2021 के चुनाव में गठबंधन था और महाजोत का वो हिस्सा थे। कांग्रेस ने ध्रुवीकरण से बचने के लिए AIUDF से इस बार गठबंधन तोड़ लिया था।
ओवैसी भी नहीं कर पाए कमाल
असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पहले हुमायूं कबीर के साथ चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। बाद में स्टिंग ऑपरेशन के बाद अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया। AIMIM ने विशेष तौर पर 8 विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन वो कहीं भी दूसरे नंबर पर भी नहीं है।
असदुद्दीन ओवैसी(सोर्स- सोशल मीडिया)
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ओवैसी बिहार जैसा कमाल बंगाल में करना चाहते थे। AIMIM ने असम में एआईयूडीएफ का समर्थन भी किया था, लेकिन इससे अजमल को कोई फायदा नहीं मिला। ओवैसी ने असम में AIUDF के पक्ष में 8 रैलियों को संबोधित किया था।
