अमित शाह, फोटो- सोशल मीडिया
Amit Shah Response on Humayun Kabir Viral Video: पश्चिम बंगाल की सियासी फिजाओं में इन दिनों आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर चरम पर है। चुनावी गहमागहमी के बीच एक वीडियो ने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी। मामला करोड़ों रुपये के कथित लेन-देन और मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की साजिश से जुड़ा है।
तृणमूल कांग्रेस द्वारा जारी किए गए एक कथित ‘स्टिंग ऑपरेशन’ वीडियो ने राजनीति की दिशा मोड़ने की कोशिश की, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर जो पलटवार किया है, उसने इस पूरे विवाद को एक अलग ही रंग दे दिया है।
दरअसल इस पूरे विवाद की शुरुआत 9 अप्रैल 2026 को हुई, जब टीएमसी ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। ये वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया। इस वीडियो में कथित तौर पर पूर्व टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर नजर आ रहे हैं। वीडियो में दावा किया गया है कि कबीर एक अज्ञात व्यक्ति से बातचीत में यह स्वीकार कर रहे हैं कि भाजपा उन्हें 1000 करोड़ रुपये दे रही है, ताकि वे अल्पसंख्यक वोटों को बांटकर ममता बनर्जी की सरकार को नुकसान पहुंचा सकें।
इस वीडियो में यह भी कहा गया कि 200 से 300 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। टीएमसी ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ एक बड़ी साजिश बताते हुए मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराने की मांग की है।
शुक्रवार को जब गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता में भाजपा का चुनावी घोषणापत्र यानी ‘संकल्प पत्र’ जारी करने पहुंचे, तो उनसे इस वायरल वीडियो पर सवाल पूछा गया। शाह ने बेहद कड़े लहजे में इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि हुमायूं कबीर और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा ‘उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव’ की तरह है, जिनका कभी कोई मेल नहीं हो सकता।
ममता बनर्जी पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि वे ऐसी 2,000 क्लिप बनाने की क्षमता रखती हैं। शाह ने यह भी साफ कर दिया कि भाजपा उस व्यक्ति से हाथ मिलाने के बजाय अगले 20 साल तक विपक्ष की बेंच पर बैठना ज्यादा पसंद करेगी, जिसका एकमात्र एजेंडा बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाना हो। उन्होंने कबीर को वैचारिक रूप से भाजपा का कट्टर विरोधी बताया।
इस पूरे मामले पर हुमायूं कबीर ने भी अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने इस वीडियो को पूरी तरह फर्जी बताते हुए दावा किया कि इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया है। कबीर का मानना है कि ममता बनर्जी उनकी बढ़ती सक्रियता से डर गई हैं, इसलिए उनकी छवि खराब करने के लिए यह साजिश रची गई है। उन्होंने इस मामले में टीएमसी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराने की भी बात कही है।
दिलचस्प बात यह है कि इस विवाद के बाद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने भी कबीर के साथ अपने गठबंधन को तोड़ दिया है। एआईएमआईएम का कहना है कि वे इस तरह के किसी भी विवादित बयान या संदिग्ध गतिविधि का हिस्सा नहीं बनना चाहते।
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जैसे-जैसे 23 अप्रैल की तारीख नजदीक आ रही है, बंगाल का चुनावी दंगल और भी पेचीदा होता जा रहा है। भाजपा ने अपने घोषणापत्र में सातवां वेतन आयोग लागू करने और महिलाओं को आर्थिक मदद देने जैसे बड़े वादे किए हैं तो वहीं ‘डील’ और ‘फंडिंग’ जैसे आरोपों ने चुनावी माहौल को गर्मा दिया है। एक तरफ जहां अमित शाह के कड़े रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा अपनी हिंदुत्व की छवि और विकास के वादों पर अडिग है तो वहीं दूसरी ओर टीएमसी अब भी भाजपा को ‘बाहरी और साजिशकर्ता’ साबित करने में अपनी पूरी ताकत झोंक रही है।