Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • चुनाव
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

बहरामपुर के गढ़ में फिर गरजेगा रॉयल बंगाल टाइगर, क्या पिछली हार का बदला ले पाएंगे अधीर?

Adhir Ranjan Chowdhury Bio: बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपने सबसे कद्दावर नेता अधीर रंजन चौधरी को बहरामपुर सीट से उम्मीदवार बनाया है, जिससे मुर्शिदाबाद का चुनावी मुकाबला रोमांचक हो गया है।

  • Written By: प्रतीक पाण्डेय
Updated On: Apr 19, 2026 | 01:47 PM

अधीर रंजन चौधरी, फोटो- सोशल मीडिया

Follow Us
Close
Follow Us:

West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जब भी मुर्शिदाबाद जिले की बात होती है, तो एक चेहरा बरबस ही आंखों के सामने आ जाता है। अधीर रंजन चौधरी, जिन्हें उनके समर्थक प्यार से बंगाल का शेर कहते हैं, एक बार फिर अपने पुराने गढ़ बहरामपुर की गलियों में पूरी ताकत के साथ सक्रिय नजर आ रहे हैं। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली अप्रत्याशित हार के बाद बहुत से लोगों ने यह मान लिया था कि शायद अधीर का सुनहरा राजनीतिक दौर अब समाप्त हो चुका है।

कांग्रेस आलाकमान ने 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए उन्हें फिर से बहरामपुर मैदान में उतारकर यह साफ कर दिया है कि वे अभी थके नहीं हैं। यह चुनाव केवल एक विधानसभा सीट को जीतने की कवायद नहीं है, बल्कि अधीर रंजन के लिए अपनी खोई हुई साख और राजनीतिक पहचान को वापस पाने की एक बड़ी और निर्णायक जंग साबित होगी।

बहरामपुर के चुनावी रण में पुराने योद्धा की वापसी

अधीर रंजन चौधरी का कद भारतीय राजनीति में बहुत ऊंचा रहा है और वे लगातार पांच बार लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं। बहरामपुर के आम मतदाताओं के साथ उनका रिश्ता दशकों पुराना है और वे यहां के हर छोटे-बड़े गांव और संकरी गलियों से अच्छी तरह वाकिफ हैं। साल 2024 में पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान के हाथों मिली शिकस्त उनके लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी क्योंकि उस सीट पर उनका एकछत्र राज माना जाता था।

सम्बंधित ख़बरें

मोदी @ बांकुरा: 2021 चुनाव में किए ढेरों वादे, 2026 में दी लास्ट वार्निंग, 5 साल में कितना बदला PM का नैरेटिव

TMC नहीं चाहती बंगाल की बेटियां ज्यादा संख्या में MLA-MP बनें…पीएम मोदी ने TMC पर लगाया विश्वासघात का आरोप

क्या बंगाल के फ्रेंच विरासत वाले गढ़ में बरकरार रहेगी दीदी की बादशाहत? जानिए कैसा है चंदननगर का चुनावी संग्राम

बंगाल चुनाव के बीच ममता के करीबी पुलिस अफसर के घर ED का छापा, रंगदारी और सिंडिकेट रैकेट से जुड़े हैं तार

उस बड़ी हार के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा भी दे दिया था। अब विधानसभा चुनाव में उतरकर वे यह साबित करना चाहते हैं कि बहरामपुर की जनता का दिल आज भी उनके लिए धड़कता है। पार्टी ने भी उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें एक बार फिर से सबसे आगे की कतार में खड़ा कर दिया है।

पुरानी हार से सबक लेकर तैयार ‘बंगाल का टाइगर’

पिछले लोकसभा चुनाव में हुई करारी हार के पीछे कई बड़े कारण बताए गए थे जिसमें भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच बढ़ता ध्रुवीकरण सबसे प्रमुख था। अधीर रंजन चौधरी ने उन तमाम कमियों का बहुत गहराई से अध्ययन किया है और अपनी चुनावी रणनीति में कई बुनियादी बदलाव किए हैं। वे बखूबी जानते हैं कि इस बार उनका मुकाबला केवल विपक्षी दलों के उम्मीदवारों से नहीं है, बल्कि खुद की छवि को दोबारा स्थापित करने की चुनौती से भी है।

मुर्शिदाबाद जिले में कांग्रेस का सांगठनिक ढांचा आज भी उनकी उंगलियों पर चलता है और वहां के कार्यकर्ता उनके एक इशारे पर एकजुट हो जाते हैं। वे अब ग्रामीण इलाकों में जाकर लोगों से सीधा संवाद कर रहे हैं और पुराने रिश्तों की गर्माहट को ताजा करने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

नक्सल आंदोलन की दहलीज से संसद तक का सफर

अधीर रंजन चौधरी का पूरा जीवन किसी रोमांचक फिल्मी पटकथा जैसा नजर आता है। सत्तर के दशक में वे सक्रिय रूप से नक्सली आंदोलन के साथ जुड़े हुए थे और बाद में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के प्रभाव में आकर उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामा था। उन्होंने अपना सबसे पहला विधानसभा चुनाव साल 1991 में नबाग्राम सीट से लड़ा था जहाँ उन्हें राजनीतिक विरोधियों के जबरदस्त प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था।

हालांकि उस कठिन चुनाव में वे मामूली अंतर से हार गए थे लेकिन 1996 में उन्होंने उसी सीट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1999 में वे पहली बार सांसद बनकर दिल्ली पहुंचे और तब से लेकर 2024 तक वे बहरामपुर के बेताज बादशाह की तरह जमे रहे। उन्होंने केंद्र सरकार में रेल राज्य मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं।

चुनावी समीकरणों को पलटने की बड़ी तैयारी

साल 2026 का बंगाल चुनाव कई मायनों में बहुत अलग होने वाला है क्योंकि कांग्रेस ने इस बार अकेले चुनाव लड़ने का साहसिक फैसला लिया है। ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में अधीर रंजन चौधरी की भूमिका और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि उन पर न केवल अपनी सीट निकालने की जिम्मेदारी है बल्कि आसपास की अन्य सीटों पर भी असर डालने का भारी दबाव है। बहरामपुर इलाके में अल्पसंख्यक और दलित मतदाताओं की संख्या काफी प्रभावशाली है और अधीर हमेशा से ही उनके बीच एक लोकप्रिय नेता रहे हैं।

यह भी पढ़ें: 2021 चुनाव में किए ढेरों वादे, 2026 में दी लास्ट वार्निंग, 5 साल में कितना बदला PM का नैरेटिव

तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर यूसुफ पठान के चेहरे का इस्तेमाल करने की योजना बनाई है लेकिन विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे और नेता की उपलब्धता सबसे ज्यादा मायने रखती है। अधीर अपनी सादगी और जनता के लिए हमेशा हाजिर रहने की छवि को अपना सबसे बड़ा हथियार बना रहे हैं।

Adhir ranjan chowdhury baharampur candidate west bengal election 2026 news

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Apr 19, 2026 | 01:47 PM

Topics:  

  • Adhir Ranjan Chowdhury
  • Assembly Election 2026
  • West Bengal Assembly Election

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.