

West Bengal elections 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बांकुरा हमेशा से एक शक्ति केंद्र रहा है। साल 2021 में जब उन्होंने यहां से हुंकार भरी थी, तब एक अलग ही माहौल था। आज 2026 में जब वे फिर से उसी जगह पर खड़े थे तो उन्होंने कई बातें कही जो 2021 के उनके भाषण को याद दिलाती हैं।
अगर हम साल 2021 और 2026 के चुनावी भाषणों की तुलना करें, तो प्रधानमंत्री के नैरेटिव में एक बड़ा बदलाव दिखाई देता है। साल 2021 में मोदी का मुख्य नारा था कि दो मई को दीदी की विदाई तय है। उस समय उन्होंने असली परिवर्तन का वादा किया था और जनता को भ्रष्टाचार मुक्त बंगाल का सपना दिखाया था। तब उनका प्रहार मुख्य रूप से कटमनी और तोलाबाजी जैसे स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित था। लेकिन साल 2026 में आते-आते यह तेवर और गंभीर हो गए हैं। अब वे ममता सरकार को केवल एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि एक निर्मम सरकार करार दे रहे हैं। इस बार उनका जोर केवल सत्ता परिवर्तन पर नहीं, बल्कि टीएमसी द्वारा फैलाए गए भय को खत्म करने पर है। वे जनता को भरोसा दिला रहे हैं कि इस साल का चुनाव ऐतिहासिक होगा और डर पर भरोसे की जीत होगी।
भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर प्रधानमंत्री का रुख अब पहले से कहीं ज्यादा कड़ा हो गया है। साल 2021 में उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा था कि दीदी के लोग जनता के सिर के साथ फुटबॉल खेल रहे हैं। बांकुरा की हालिया सभा में उन्होंने सीधे तौर पर टीएमसी के समर्थकों और गुंडों को संबोधित करते हुए अंतिम अल्टीमेटम देते हुए कहा कि चुनाव परिणाम आने वाले दिन यानी 4 मई से पहले सभी अराजक तत्व पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दें। उनकी यह घोषणा कि चुनाव बाद किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, उनके आक्रामक रुख को स्पष्ट करती है। यह केवल एक चुनावी जुमला नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए सीधी चेतावनी है जो चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश करते हैं।
महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के मोर्चे पर भी मोदी की रणनीति में बदली है। 2021 में उन्होंने राज्य में पानी की किल्लत और नल से जल जैसी बुनियादी समस्याओं पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना लागू करने की बात की थी। लेकिन 2026 में उनका फोकस नीतिगत बदलावों और आर्थिक सहायता पर है। उन्होंने टीएमसी और कांग्रेस पर महिला आरक्षण बिल को जानबूझकर रोकने की साजिश का आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने बंगाल की महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ा चुनावी वादा किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की है कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो महिलाओं को घर बनाने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत डेढ़ लाख रुपये तक की सीधी आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा, उन्होंने आदिवासी कार्ड खेलते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के विरोध का मुद्दा उठाकर टीएमसी को आदिवासी विरोधी घोषित करने का प्रयास किया है।
पूरे घटनाक्रम को देखा जाए तो 2021 का चुनाव जहां विकास और डबल इंजन सरकार की जरूरत पर आधारित था, वहीं 2026 का चुनाव सुरक्षा, अस्मिता और सीधी कार्रवाई के इर्द-गिर्द सिमट गया है। प्रधानमंत्री ने कुर्मी समुदाय की अनदेखी और घुसपैठियों को आरक्षण देने के आरोपों के जरिए ममता सरकार की घेराबंदी की है। उन्होंने साफ कर दिया है कि टीएमसी केवल अपने वोट बैंक को साधने के लिए हर कानून तोड़ रही है।