-
रवि, 26 जुलाई 2026 ई-पेपर
Top News
- Hindi News »
- Delhi »
- Jantar Mantar Facial Recognition Delhi Police Surveillance Delhi High Court Challenge
Explainer: CJP प्रदर्शन में शामिल होना अब पड़ेगा भारी? जानें फेशियल रिकग्निशन पर हाईकोर्ट में क्यों मचा बवाल
- Written By: अक्षय साहू
Jantar Mantar Protest: CJP प्रदर्शन के दौरान फेशियल रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल को लेकर विवाद बढ़ गया है। दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका ने निजता, लोकतांत्रिक अधिकार और पुलिस पर सवाल उठाए हैं।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई को लेकर सवालों के घेरे में दिल्ली पुलिस (AI जेनरेटेड इमेज)
Jantar Mantar Protest Facial Recognition: दिल्ली का जंतर-मंतर सालों से देश में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां छात्र, कर्मचारी, सामाजिक संगठन और विभिन्न राजनीतिक दल अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते रहे हैं। हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने यहां हजारों छात्रों के साथ मिलकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद छात्रों का प्रदर्शन पर समाप्त हो चुका है, लेकिन इसके साथ एख नया विवाद समाने आया है।
इस बार सवालों के घेरे में राजधानी दिल्ली की पुलिस है। दिल्ली पुलिस पर आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों की निगरानी के लिए कैमरों, वीडियो रिकॉर्डिंग और फेशियल रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया। इस मुद्दे को लेकर अब दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। आइए आपको बताते हैं कि प्रदर्शन के दैरान फेशियल रिकग्निशन तकनीक की इस्तेमाल करना सही या गलत? इसे लेकर क्या नियम है?
जेएनयू की पूर्व छात्रा ने उठाए सवाल
इस मामले में पूर्व जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष ने दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में जंतर-मंतर पर लगाए गए स्थायी निगरानी टावरों और आधुनिक पुलिस वाहनों पर सवाल उठाए गए हैं। दावा किया गया है कि इन वाहनों में लगे कैमरे और फेशियल रिकग्निशन तकनीक प्रदर्शन में शामिल लोगों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने का मामला नहीं है, बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है।
सम्बंधित ख़बरें
एग्जाम रिफॉर्म पर बनाई हाई पावर्ड कमेटी…पेपर लीक पर PM मोदी ने पोस्ट की एक और रील, देखें VIDEO
Explainer: एक प्रधान के जाने से क्या बदल जाएगी पूरी शिक्षा व्यवस्था? प्रदर्शन सफल, लेकिन कहां फेल हो गई CJP!
छात्र आंदोलन खत्म, अब RAF के लाठीचार्ज पर होगी पड़ताल! CRPF ने शुरू किया पोस्ट-ऑपरेशन रिव्यू
क्या शाह ने दी पैलेट गन चलाने की मंजूरी? राहुल गांधी ने गृहमंत्री को लिखा खत, पुलिस कार्रवाई पर मांगी जवाबदेही
प्रदर्शनकारियों के चेहरे की पहचान कर रही थी पुलिस (सोर्स- सोशल मीडिया)
याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस की निगरानी केवल मंच, भाषण या जुलूस तक सीमित नहीं है। प्रदर्शन में शामिल लोगों के खाने, आराम करने, मेडिकल सहायता लेने और अन्य निजी गतिविधियों की भी वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह की व्यापक निगरानी नागरिकों की निजता पर सीधा असर डालती है। उनका तर्क है कि प्रदर्शन में शामिल हर व्यक्ति को लगातार कैमरों की नजर में रखना लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर कर सकता है।
क्या है फेशियल रिकग्निशन तकनीक?
फेशियल रिकग्निशन एक डिजिटल तकनीक है जो किसी व्यक्ति के चेहरे की बनावट का विश्लेषण करके उसकी पहचान करने की कोशिश करती है। यह आंखों की दूरी, नाक, जबड़े और चेहरे की अन्य विशेषताओं के आधार पर एक डिजिटल प्रोफाइल तैयार करती है। इसके बाद इस प्रोफाइल की तुलना पहले से मौजूद सरकारी या पुलिस डेटाबेस की तस्वीरों से की जाती है। अगर दोनों में समानता मिलती है, तो सिस्टम संभावित पहचान बता देता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक पूरी तरह सटीक नहीं होती और कई बार गलत पहचान भी कर सकती है।
चेहरे की पहचान करता है फेशियल रिकग्निशन (सोर्स- सोशल मीडिया)
फेशियल रिकग्निशन तकनीक की सबसे बड़ी चुनौती इसकी संभावित गलतियां हैं। अगर किसी निर्दोष व्यक्ति की पहचान गलती से किसी संदिग्ध के रूप में हो जाए, तो उसे पूछताछ, जांच या अन्य कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि कई विशेषज्ञ इस तकनीक के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट कानून, जवाबदेही और स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था की मांग करते हैं। उनका मानना है कि बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के इस तकनीक का व्यापक उपयोग नागरिकों के अधिकारों पर असर डाल सकता है।
प्रदर्शन के अधिकार पर पड़ सकता है डर का असर
भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार देता है। लेकिन याचिका में कहा गया है कि यदि प्रदर्शनकारियों को यह महसूस होने लगे कि उनका चेहरा रिकॉर्ड किया जा रहा है और उनकी पहचान भविष्य के लिए सुरक्षित रखी जा रही है, तो वे प्रदर्शन में शामिल होने से बच सकते हैं। कानून की भाषा में इसे ‘चिलिंग इफेक्ट’ कहा जाता है। इसका मतलब है कि डर की वजह से लोग अपने वैध संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करने से हिचकने लगते हैं।
जंतर-मंतर में तैनात थे कई सर्विलांस वाहन (सोर्स- सोशल मीडिया)
साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस के.एस. पुट्टस्वामी मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए निजता को मौलिक अधिकार माना था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि निजता केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर भी व्यक्ति की गरिमा, व्यक्तिगत जानकारी और निजी जीवन की सुरक्षा महत्वपूर्ण हैं। किसी व्यक्ति का सड़क पर दिखाई देना और उसकी हर गतिविधि को डिजिटल तरीके से रिकॉर्ड कर लंबे समय तक सुरक्षित रखना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। यही अंतर इस पूरे विवाद का मुख्य आधार बना हुआ है।
कानून विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों के मुताबिक, पुट्टस्वामी फैसले के अनुसार निजता प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। उनके मुताबिक यदि प्रदर्शनकारियों की लगातार निगरानी की जाती है, तो इससे उनके अधिकार प्रभावित हो सकते हैं और लोगों में डर का माहौल बन सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी प्रदर्शन के दौरान हिंसा होती है, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचता है या पुलिसकर्मियों पर हमला होता है, तो कानून-व्यवस्था बनाए रखने और दोषियों की पहचान करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल उचित माना जा सकता है।
महिलाओं की निजता और गरिमा का मुद्दा
याचिका में महिलाओं की गरिमा और निजता को लेकर भी चिंता जताई गई है। आरोप है कि बारिश के दौरान पर्याप्त व्यवस्था न होने से कुछ महिलाओं को भीगे कपड़ों में प्रदर्शन स्थल पर रहना पड़ा और उस दौरान भी वीडियो रिकॉर्डिंग जारी रही।
महिलाओं की सुरक्षा और निजता को लेकर उठे सवाल (सोर्स- सोशल मीडिया)
याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसी संवेदनशील परिस्थितियों में बिना सहमति रिकॉर्डिंग करना व्यक्ति की गरिमा को प्रभावित कर सकता है। यह चिंता केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि बुजुर्गों, दिव्यांगों और बीमार प्रदर्शनकारियों पर भी लागू होती है।
यह भी पढ़ें- Kargil Vijay Diwas 2026: AI, ड्रोन और रोबोटिक्स से हाई-टेक बन रही भारतीय सेना, युवाओं के लिए बढ़े नए अवसर
सरकार और पुलिस ने क्या जवाब दिया?
सरकार ने अदालत में कहा है कि प्रदर्शन स्थलों पर वीडियो रिकॉर्डिंग कानून-व्यवस्था बनाए रखने का सामान्य उपाय है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि खुले सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शन करने वालों की निजता का दायरा सीमित होता है। इसके अलावा कई प्रदर्शनकारी स्वयं भी अपने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। सरकार का तर्क है कि हिंसा, तोड़फोड़ और अन्य आपराधिक मामलों की जांच में वीडियो रिकॉर्डिंग महत्वपूर्ण सबूत के रूप में काम आती है और भीड़ प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल आवश्यक है।
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सार्वजनिक सुरक्षा और नागरिकों की निजता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। दिल्ली हाईकोर्ट अब यह तय करेगा कि जंतर-मंतर पर फेशियल रिकग्निशन और व्यापक निगरानी का उपयोग कानून के अनुरूप है या नहीं।
Jantar mantar facial recognition delhi police surveillance delhi high court challenge
Get Latest Hindi News , Maharashtra News , Entertainment News , Election News , Business News , Tech , Auto , Career and Religion News only on Navbharatlive.com
लेटेस्ट न्यूज़
UP Gochar Bhumi Mission: UP में 39,721 हजार हेक्टेयर गोचर भूमि अतिक्रमण मुक्त, हरित चारा में हरदोई बना नंबर-1
Jul 26, 2026 | 07:20 PMधर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सुनते ही मैकडॉनल्ड्स में गूंजे ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे, वीडियो वायरल
Jul 26, 2026 | 07:19 PMएग्जाम रिफॉर्म पर बनाई हाई पावर्ड कमेटी…पेपर लीक पर PM मोदी ने पोस्ट की एक और रील, देखें VIDEO
Jul 26, 2026 | 07:19 PM‘पुकी पुलिसवाले’ बने महाराष्ट्र पुलिस के कॉन्स्टेबल, शर्माते हुए रिएक्शन ने इंटरनेट का दिल जीत लिया
Jul 26, 2026 | 07:09 PMकाजोल का पेरेंट्स डे पर इमोशनल पोस्ट वायरल, बोलीं- उनकी कुर्बानियां समझने के लिए खुद माता-पिता बनना पड़ता है
Jul 26, 2026 | 07:06 PMExplainer: CJP प्रदर्शन में शामिल होना अब पड़ेगा भारी? जानें फेशियल रिकग्निशन पर हाईकोर्ट में क्यों मचा बवाल
Jul 26, 2026 | 07:03 PMदुबई में टायर पंचर होने पर भारतीय महिला की मदद को रुकी पुलिस, बोली- ऐसी सुरक्षा कहीं और नहीं देखी
Jul 26, 2026 | 07:00 PMवीडियो गैलरी

अब बात होगी तो सिर्फ PoK पर…, कारगिल वॉर मेमोरियल से राजनाथ सिंह की पाकिस्तान को सख्त चेतावनी; देखें Video
Jul 26, 2026 | 02:41 PM
भोपाल के हथाईखेड़ा डैम में नियमों की उड़ रही धज्जियां, प्रशासन ने जांच का दिया भरोसा-VIDEO
Jul 26, 2026 | 01:43 PM
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तेज प्रताप का बड़ा बयान, बोले- छात्रों ने सरकार को झुका दिया-VIDEO
Jul 26, 2026 | 01:08 PM
5 साल की उम्र में पोलियो, फिर भी नहीं मानी हार… झंडू कुमार की कहानी करेगी भावुक-VIDEO
Jul 26, 2026 | 12:16 PM
सोनम वांगचुक से लेकर युवाओं के वीडियो तक… संजय सिंह ने गिनाए उदाहरण-VIDEO
Jul 26, 2026 | 11:56 AM
‘सपा गुंडागर्दी पर उतर आई है’… ओपी राजभर का अखिलेश यादव पर बड़ा हमला-VIDEO
Jul 26, 2026 | 11:30 AM













