दिल्ली विधानसभा। इमेज-सोशल मीडिया
Delhi Assembly Session: दिल्ली विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो रहा है। इसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा की संभावना है। सत्र 8 जनवरी तक चलेगा। 4 दिनों तक चलने वाले इस सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस दिख सकती है। पुराना सचिवालय स्थित विधानसभा भवन फिर राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा, जहां जनप्रतिनिधि जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाएंगे। इस सत्र के दौरान सरकार सदन में 3 महत्वपूर्ण कैग रिपोर्ट भी पेश करेगी।
शीतकालीन सत्र होने के कारण सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। सत्र की औपचारिक शुरुआत सुबह 11 बजे उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के अभिभाषण से होगी। इसके बाद सदन की कार्यवाही 30 मिनट के अंतराल के बाद शुरू की जाएगी। अभिभाषण में सरकार की नीतियों, आगामी योजनाओं और प्रमुख मुद्दों का खाका पेश किए जाने की उम्मीद है।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि आठवीं दिल्ली विधानसभा का चौथा सत्र सोमवार से शुरू होगा। उपराज्यपाल का अभिभाषण होगा और फिर 8 जनवरी तक सदन चलेगा। विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। CAG की रिपोर्ट आएगी। कुल मिलाकर इस सदन में सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। जनहित के मुद्दों पर चर्चा होगी।
इस शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार का विशेष फोकस प्रदूषण और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर रहेगा। राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सदन में चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही सरकार प्रदूषण और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित एक प्रस्ताव भी सदन के पटल पर रखेगी। माना जा रहा कि यह सत्र दिल्ली की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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सत्र के दौरान सरकार सदन में 3 महत्वपूर्ण नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) रिपोर्ट भी पेश करेगी। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास, जिसे शीश महल कहा जा रहा है, से जुड़ी रिपोर्ट शामिल है। इसके अतिरिक्त दिल्ली जल बोर्ड से संबंधित कैग रिपोर्ट और दिल्ली सरकार की ओर से संचालित विश्वविद्यालयों पर आई कैग रिपोर्ट सदन में रखी जाएगी। इन रिपोर्टों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
दिल्ली विधानसभा सचिवालय द्वारा पूर्व में जारी प्रेस नोट में कहा गया कि विधानसभा सत्र के रूप में इस शीतकालीन सत्र का विशेष महत्व है। विकास कार्यों की प्रगति, प्रशासनिक दक्षता और वित्तीय अनुशासन जैसे विषयों के केंद्र में रहने की संभावना है। सीमित अवधि और बढ़ती जन अपेक्षाओं के बीच यह सत्र विस्तृत बहसों की बजाय केंद्रित विधायी समीक्षा के रूप में सामने आने की संभावना है।