अमित शाह। इमेज-सोशल मीडिया
Amit Shah Today News : देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ा और निर्णायक ऐलान किया है। दिल्ली पुलिस के स्थापना दिवस समारोह में शाह ने विश्वास जताया कि 31 मार्च तक भारत पूरी तरह से नक्सली हिंसा के दंश से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवाद अब अपने अंतिम चरण में है और सरकार इसे जड़ से मिटाने के बेहद करीब पहुंच चुकी है।
अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि 2014 के बाद के ये 12 साल देश की आंतरिक सुरक्षा के इतिहास में स्वर्ण युग साबित हुए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय देश तीन मोर्चों पर जूझ रहा था-कश्मीर का उग्रवाद, पूर्वोत्तर की हिंसा और 11 राज्यों में फैला नक्सलवाद। शाह ने बताया कि आज पूर्वोत्तर के 10000 से ज्यादा युवा हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट आए हैं और दर्जनों शांति समझौतों ने वहां के हालात बदल दिए हैं।
गृह मंत्री ने देश की सीमाओं को लेकर अपना संकल्प दोहराते हुए कहा कि सरकार एक ऐसी अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली विकसित कर रही है कि कोई भी घुसपैठिया सीमा पार नहीं कर पाएगा। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था के डिजिटलीकरण पर जोर देते हुए बताया कि आने वाले समय में पूरे देश में सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया जाएगा। इसके नई न्याय संहिता (आपराधिक कानूनों) को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को और भी अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में आज दिल्ली पुलिस के 79वें स्थापना दिवस समारोह में ₹857 करोड़ की लागत से निर्मित ‘सेफ सिटी प्रोजेक्ट’ का लोकार्पण किया। साथ ही, ₹368 करोड़ की लागत से स्पेशल सेल के इंटीग्रेटेड हेडक्वार्टर का ई-शिलान्यास किया। pic.twitter.com/zZORCOHUuO — Amit Shah (@AmitShah) February 16, 2026
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समारोह के दौरान अमित शाह ने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के एकीकृत मुख्यालय की आधारशिला रखी और सेफ सिटी प्रोजेक्ट के पहले चरण का उद्घाटन किया। इस प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली में 21000 आधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। इनमें से 10000 कैमरे चालू भी हो चुके हैं। ये सभी कैमरे एक आधुनिक कमांड कंट्रोल सेंटर से जुड़े होंगे, जो राजधानी की सुरक्षा को वैश्विक मानकों तक ले जाएगा। शाह ने दिल्ली पुलिस के जवानों के समर्पण की तारीफ करते हुए कहा कि आधुनिकीकरण और तकनीक के समावेश से ही हम एक सुरक्षित भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। 2026 की समयसीमा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार अब नक्सलवाद के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के अंतिम पड़ाव पर है।