दावत के लिए बिरयानी तैयार है…शाहीन का प्लान शोबा ए दावत हुआ डिकोड, आतंकियों ने यूज किए ये कोडवर्ड
Delhi Blast Terrorist Codewords: दिल्ली धमाके की जांच में सामने आया है कि आतंकियों ने डिजिटल चैटबॉक्स के माध्यम से कोडवर्ड्स में बात की थी। एजेंसियों ने कुछ कोडवर्ड्स डिकोड किए हैं।
- Written By: रंजन कुमार
दिल्ली में हुआ कार ब्लास्ट और वारदात के लिए इस्तेमाल बिरयानी कोडवर्ड। इमेज-एआई
Delhi Blast Live Updates: दिल्ली धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही, आतंकियों की साजिश पर्दाफाश हो रहे हैं। अब एजेंसियों को जांच महत्वपूर्ण डिजिटल चैटबॉक्स मिला है। इसने इस पूरी साजिश को उजागर कर दिया है। चैटबॉक्स में आतंकियों की बातचीत के ऐसे संदेश मिले हैं, जो यह दिखाते हैं कि उन्होंने धमाके की योजना को कोडवर्ड्स के जरिए अंजाम देने की कोशिश की थी।
धमाके को लेकर दावत शब्द का इस्तेमाल हुआ था। विस्फोटक सामग्री को बिरयानी कहा गया था। चैट में लिखा गया आखिरी संदेश था-दावत के लिए बिरयानी तैयार है। यह संदेश डॉ. शाहीन की तरफ से भेजा गया था। मैसेज 13 जुलाई को भेजा गया था। इसके बाद इस चैटबॉक्स का इस्तेमाल नहीं किया गया।
जैश-ए-मोहम्मद का खतरनाक प्लान
जैश-ए-मोहम्मद का खतरनाक प्लान शोबा ए दावत डिकोड हो गया है। भारत में इसकी कमान डॉ. शाहीन के हाथ में थी। जमात उल-मोमिनात की भारत में चीफ कमांडर डॉ. शाहीन हैं। ये आतंकी संगठन मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर चलाती है। संगठन का काम महिलाओं को जिहाद के लिए तैयार करना होता है।
शोबा ए दावत समझें
शोबा ए दावत ब्रेनवाश का खतरनाक खेल है। शोबा ए दावत जैश का वह विभाग है, जो नए लड़के-लड़कियों का ब्रेनवॉश करता है। शोबा ए दावत में नए आतंकियों का समझाया जाता है कि जन्नत में जाने के लिए भारत के खिलाफ जिहाद करना जरूरी है। शाहीन को शुरुआती ट्रेनिंग दौरा ए तस्किया का जिम्मा दिया गया था। इसमें लड़कियों को धार्मिक किताबों के बहाने जिहाद का जहर भरा जाता है। शाहीन जैश की दौरा आयत उल निसाह ट्रेनिंग ले चुकी है। सूत्रों की मानें तो मजहब की किताबों में महिलाओं के लिए भी जिहाद करने के बारे में बताने के लिए शाहीन को ट्रेनिंग मिली है।
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डिजिटल निगरानी से बचने के लिए कोडवर्ड्स इस्तेमाल किए
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार धमाके, विस्फोटक, और हमले आदि शब्दों की जगह वो लोग रोजमर्रा के सामान्य शब्दों का प्रयोग कर रहे थे। इसका मकसद डिजिटल निगरानी से बचना था। यह रणनीति आतंकियों की ओर से पहले भी कई घटनाओं में अपनाई जाती रही है। इस मामले में इस्तेमाल किए गए शब्दों ने जांच एजेंसियों को चौंका दिया।
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चैट बॉक्स के जरिये बाकी लोगों की होगी पहचान
सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि डिजिटल फॉरेंसिक जांच से इस चैट के बाकी सदस्यों की पहचान हो जाएगी। इससे इस आतंकी नेटवर्क का पूरा जाल सामने आ जाएगा। इस कार ब्लास्ट में आतंकी ग्रुप का हाथ होने की बात क्लियर होने के बाद तमाम एजेंसियों को विभिन्न राज्यों की पुलिस ने अपनी जांच-पड़ताल और तेज कर दी है।
