राघव चड्ढा, अरविंद केजरीवाल
Raghav Chadha AAP Conflict News: आम आदमी पार्टी में मचे घमासान के बीच राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बागी सुरों ने एक पुरानी बहस को फिर हवा दे दी है। ‘खामोश करवाया गया हूँ, हारा नहीं हूँ’ जैसे बयानों के साथ चड्ढा ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। उनके इस बयान के बाद पार्टी की तरफ से भी पहले सौरभ भारद्वाज फिर अनुराग ढांडा ने आकर आरोपों की बौछार की है। पार्टी का कहना है कि राघव चड्ढा अब अरविंद केजरीवाल के सिपाही नहीं रहे हैं और सरकार के खिलाफ खुलकर बोलने से घबराने लगे हैं। अनुराग ढांडा ने कहा, “हम केजरीवाल के सिपाही हैं। निडरता हमारी पहली पहचान है। जो डर जाए, वो देश के लिए क्या लड़ेगा?
बहरहाल तब से अब तक यमुना में काफी पानी बह गया और देखते ही देखते कहानी ने जबर्दस्त मोड़ ले लिया है। अब राघव चड्ढा (Raghav Chadha) उन दिग्गजों की फेहरिस्त में शामिल होते दिख रहे हैं, जिन्होंने कभी अरविंद केजरीवाल के कंधे से कंधा मिलाकर पार्टी खड़ी की थी, लेकिन बाद में रास्ते जुदा कर लिए। आम आदमी पार्टी के गठन के बाद से अब तक कई नेताओं ने भी AAP से दूरी बना ली है। इनमें राजेंद्र पाल गौतम, योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, आशुतोष और कुमार विश्वास जैसे दिग्गज शामिल हैं। इस लिस्ट में अब राघव चड्ढा का नाम भी शामिल होता दिख रहा है।
जनवरी 2024 में आम आदमी पार्टी ने स्वाति मालीवाल को राज्यसभा भेजा था। मार्च 2024 में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद स्वाति मालीवाल विदेश चली गईं, जिसे उन्होंने व्यक्तिगत कारण बताया। मई में जब केजरीवाल जेल से बाहर आए, तो मालीवाल उनसे मिलने पहुंचीं।
स्वाती मालीवाल, अरविंद केजरीवाल (Image- Social Media)
मालीवाल का आरोप है कि इसी दौरान केजरीवाल के निजी सचिव ने उनके साथ मारपीट की। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, निजी सचिव बिभव ने उन्हें 8 थप्पड़ मारे। इस मामले में पार्टी नेतृत्व ने बिभव का समर्थन किया, जिसके बाद मालीवाल ने पार्टी के खिलाफ रुख अपनाया। उनका कहना था कि किसी दबाव के कारण केजरीवाल और पार्टी ने बिभव पर कार्रवाई नहीं की।
28 मार्च 2015 को आम आदमी पार्टी ने योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से हटा दिया। उस समय दिल्ली में राष्ट्रीय परिषद की बैठक चल रही थी, लेकिन दोनों नेता बीच में ही बैठक छोड़कर बाहर आ गए। उस दौरान, योगेंद्र यादव ने कहा कि बैठक में लोकतंत्र की अनदेखी हुई, जबकि प्रशांत भूषण ने इसे उनके खिलाफ साजिश बताया। उनका आरोप था कि कुछ लोगों के साथ मारपीट भी हुई। पार्टी नेता प्रोफेसर आनंद कुमार ने भी कहा कि बैठक की कार्यवाही लोकतांत्रिक नहीं थी और उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला।
अरविंद केजरीवाल योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण (Image- Social Media)
वरिष्ठ नेता और मशहूर वकील शांति भूषण को भी धीरे-धीरे पार्टी से किनारे कर दिया गया। वे भी पार्टी में केंद्रीकरण के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।
शुरुआती दौर से जुड़े प्रो. आनंद कुमार ने “एक व्यक्ति, एक पद” की मांग उठाई थी। बाद में उन्हें भी पार्टी से अलग कर दिया गया।
पत्रकारिता छोड़कर अन्ना आंदोलन से जुड़ी शाजिया इल्मी ने आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। बाद में उन्होंने केजरीवाल पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी और अब बीजेपी में हैं।
पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल कुमार विश्वास के केजरीवाल से मतभेद हो गए थे। उन्हें पंजाब चुनाव में प्रचार न करने को कहा गया और बाद में पीएसी व राजस्थान प्रभारी पद से हटा दिया गया। हालांकि कुछ समय बाद उन्हें वापस पीएसी में लिया गया, लेकिन अंततः उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
कुमार विश्वास, अरविंद केजरीवाल (Image- Social Media)
दिल्ली में सरकार बनने के बाद सबसे पहले बगावत करने वाले विधायक विनोद कुमार बिन्नी थे। उन्होंने खुलकर केजरीवाल पर आरोप लगाए, जिसके चलते उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। वे अन्ना आंदोलन से पहले से ही केजरीवाल के साथ जुड़े थे।
योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण समेत अन्य नेताओं को हटाए जाने के बाद मयंक गांधी ने अपने ब्लॉग में एक लेख लिखकर केजरीवाल पर कई आरोप लगाए। इसके कुछ समय बाद उन्होंने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
अरविंद केजरीवाल, राघव चड्ढा (Image- Social Media)
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जिस तरह से राघव चड्ढा (Raghav Chadha) मामले में अब अनुराग ढांडा और सौरभ भारद्वाज जैसे नेता आमने-सामने हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में आम आदमी पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। क्या राघव चड्ढा भी उन्हीं पुराने दिग्गजों की तरह पार्टी से पूरी तरह किनारे कर दिए जाएंगे या फिर वे अपनी ‘बाढ़’ वाली चेतावनी को हकीकत में बदलेंगे, यह वक्त ही बताएगा। फिलहाल, राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी की लड़ाई ने दिल्ली से लेकर पंजाब तक की सियासत में हलचल तेज कर दी है।
Ans: उन्हें राज्यसभा के उपनेता पद से हटाए जाने और संसद में बोलने से रोकने के आरोपों के बाद Raghav Chadha चर्चा में हैं।
Ans: नहीं, अभी उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी है, लेकिन उनके बयानों से गंभीर मतभेद उजागर हुए हैं।
Ans: ढांडा ने कहा कि राघव अब 'केजरीवाल के सिपाही' नहीं रहे और वे सरकार के खिलाफ बोलने से डरते हैं।