पुलिस-छात्रों में हिंसक झड़प, फोटो- सोशल मीडिया
JNU Protest News Hindi: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों और हिंसा का केंद्र बन गया है। गुरुवार को शिक्षा मंत्रालय तक ‘लॉन्ग मार्च’ निकालने की कोशिश कर रहे छात्रों की पुलिस के साथ तीखी झड़प हुई। इस संघर्ष में जहाँ 25 पुलिसकर्मी लहूलुहान हुए, वहीं छात्रों ने पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया है।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ ने गुरुवार को परिसर से शिक्षा मंत्रालय तक एक ‘लॉन्ग मार्च’ निकालने का आह्वान किया था। यह प्रदर्शन विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित द्वारा हाल ही में एक पॉडकास्ट में की गई टिप्पणियों के विरोध में आयोजित किया गया था। छात्रों का आरोप है कि कुलपति ने यूजीसी मानदंडों, छात्र संघ पदाधिकारियों के निलंबन और प्रस्तावित रोहित अधिनियम पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।
#WATCH दिल्ली: JNU कैंपस से सुबह की वीडियो। JNU स्टूडेंट यूनियन ने UGC के नियमों को लागू करने की मांग को लेकर सुबह-सुबह प्रोटेस्ट किया। दिल्ली पुलिस ने स्टूडेंट्स को कैंपस के अंदर रोकने के लिए बैरिकेड्स लगाए थे। pic.twitter.com/difTAGy4fr — ANI_HindiNews (@AHindinews) February 27, 2026
पुलिस के अनुसार, जेएनयू प्रशासन ने पहले ही प्रदर्शनकारी छात्रों को सूचित कर दिया था कि परिसर के बाहर किसी भी प्रकार के मार्च की अनुमति नहीं दी गई है और उन्हें अपना विरोध परिसर के भीतर ही सीमित रखना चाहिए। इसके बावजूद, दोपहर लगभग 3:20 बजे, तकरीबन 400-500 छात्र विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से बाहर निकले और मंत्रालय की ओर बढ़ने का प्रयास किया, जहाँ पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोक लिया।
जैसे ही छात्रों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, स्थिति हिंसक हो गई। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठियां, बैनर और जूते फेंके। पुलिस ने छात्रों पर बेहद गंभीर और अजीबोगरीब आरोप भी लगाए हैं। पुलिस के दावों के मुताबिक, झड़प के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों ने तैनात पुलिसकर्मियों को दांत से काट लिया।
इस हिंसक झड़प में 25 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस का कहना है कि उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए न्यूनतम बल का प्रयोग किया, जबकि छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार किया और उन पर बर्बरता से लाठियां बरसाईं, जिससे कई छात्र घायल हो गए।
झड़प के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 51 प्रदर्शनकारी छात्रों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए प्रमुख चेहरों में जेएनयूएसयू की अध्यक्ष अदिति मिश्रा और पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार शामिल हैं। पुलिस ने इस मामले में वसंत कुंज पुलिस स्टेशन में FIR संख्या 76/26 दर्ज की है।
छात्रों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं, जिनमें धारा 221, 121(1), 132 और 3(5) शामिल हैं, के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं में सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी करने से रोकने, पुलिसकर्मियों पर हमला करने, उन्हें चोट पहुँचाने, गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
इस घटना के बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (JNUTA) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर पुलिस की कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। संघ ने आरोप लगाया कि पुलिस ने छात्रों को उनके लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित करने के लिए “अत्यधिक बल प्रयोग” किया, जिसमें कई छात्राएं भी घायल हुई हैं।
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शिक्षक संघ ने हिरासत में लिए गए छात्रों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका दावा है कि कुछ छात्रों को पुलिस द्वारा “अपुष्ट स्थानों” पर ले जाया गया है, जिससे उनकी सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। संघ ने मांग की है कि सभी हिरासत में लिए गए छात्रों को तत्काल बिना शर्त रिहा किया जाए और विश्वविद्यालय प्रशासन को इस मामले में हस्तक्षेप कर छात्रों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।