मैं न गांधी हूं, न कोई हीरो… भूख हड़ताल के बीच सोनम वांगचुक की अपील, बोले- अपनी जिंदगी के खुद बनें नायक
Sonam Wangchuk Statement: सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे 14 दिन हो गए हैं। इस दौरान उन्होंने खुद को एक सामान्य नागरिक बताते हुए लोगों से आंदोलन में भाग लेने की अपील की।
- Written By: दिव्या सिंह
सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके (सोर्स- सोशल मीडिया)
Sonam Wangchuk Hunger Strike: शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जंतर-मंतर पर जारी अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान लोगों से भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि उन्हें आधुनिक गांधी या हीरो कहे जाने से असहजता होती है और वे खुद को केवल एक सामान्य नागरिक मानते हैं, जो अपनी जिम्मेदारियां निभाने की कोशिश कर रहा है। वांगचुक के अनशन को शनिवार को 14 दिन हो गए, जबकि इस आंदोलन का समर्थन कर रहे संगठन का प्रदर्शन 22वें दिन जारी रहा।
7.5 किलो वजन घटा, फिर भी आंदोलन जारी
आंदोलन की ओर से जारी स्वास्थ्य अपडेट के अनुसार, भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से सोनम वांगचुक का वजन करीब 7.5 किलोग्राम कम हो गया है। उनका ब्लड प्रेशर 106/74 दर्ज किया गया। शुक्रवार रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए वीडियो में उन्होंने कहा कि पिछले दिन की तुलना में उनकी ऊर्जा कम महसूस हो रही है, लेकिन आंदोलन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पहले जैसी ही बनी हुई है।
‘मैं बस एक आम नागरिक हूं’
वांगचुक ने सोशल मीडिया पर आंदोलन का समर्थन करने वालों का धन्यवाद करते हुए कहा कि दो तरह की प्रतिक्रियाएं उन्हें सबसे अधिक असहज करती हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें 21वीं सदी का गांधी या आधुनिक गांधी कहते हैं, जबकि कई लोग उन्हें हीरो बताते हैं। उन्होंने कहा कि, मैं न गांधी हूं और न ही कोई हीरो। मैं बस एक आम नागरिक हूं जिसने अपनी जिम्मेदारियां निभाने की कोशिश की है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी एक व्यक्ति को अपना नायक बनाने के बजाय स्वयं अपनी जिम्मेदारियां निभाएं और अपनी जिंदगी के हीरो खुद बनें।
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आंदोलन में शामिल होने की अपील
परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और उससे जुड़े छात्रों के मुद्दों का उल्लेख करते हुए वांगचुक ने लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि रोज जंतर-मंतर आना संभव नहीं है, तो कम से कम एक दिन आंदोलन का हिस्सा बनें। जो लोग दिल्ली नहीं आ सकते, वे अपने शहर में प्रतीकात्मक उपवास रखकर समर्थन जता सकते हैं।
उन्होंने 20 जुलाई को संसद तक प्रस्तावित शांतिपूर्ण मार्च में अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि इस मार्च में भाग लेने के लिए भूखा रहने की जरूरत नहीं है, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी आवाज उठाना जरूरी है।
हटाने की कोशिश हुई तो अधिकारों का उल्लंघन होगा
सोनम वांगचुक ने कहा कि वह अपनी इच्छा से जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे हैं और उनकी जान को तत्काल कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें जबरन प्रदर्शन स्थल से हटाया जाता है, तो यह शांतिपूर्ण विरोध के उनके संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अनशन कथित परीक्षा अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करने और लद्दाख से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान की मांग को लेकर जारी रहेगा।
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यह विरोध प्रदर्शन 20 जून से शुरू हुआ था, जबकि सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। आंदोलनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, कथित परीक्षा अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे तथा शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही 20 जुलाई को संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की घोषणा भी की गई है।
