Project 17A: समुद्र में बढ़ेगी दुश्मनों की टेंशन, भारतीय नौसेना में शामिल हुआ INS महेंद्रगिरि
Indian Navy: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में INS महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना में शामिल किया। यह भारत की समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को नई मजबूती देगा।
- Written By: दिव्या सिंह
INS महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना में शामिल (सोर्स- सोशल मीडिया)
INS Mahendragiri In Indian Navy: भारतीय नौसेना को शनिवार को एक और अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोत INS महेंद्रगिरि (INS Mahendragiri) के रूप में बड़ी ताकत मिली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम स्थित नौसैनिक डॉकयार्ड में आयोजित समारोह के दौरान इस स्टेल्थ फ्रिगेट को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल किया। इस अवसर पर रक्षा मंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
INS महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट-17A के तहत तैयार की गई नीलगिरि श्रेणी का छठा स्टेल्थ फ्रिगेट है। इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने किया है। यह प्रोजेक्ट-17A के अंतर्गत MDL द्वारा निर्मित चौथा और अंतिम युद्धपोत भी है।
Speaking at the Commissioning Ceremony of “INS Mahendragiri” in Visakhapatnam. https://t.co/1Z8SM7QDsp — Rajnath Singh (@rajnathsingh) July 11, 2026
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भारतीय नौसेना में शामिल INS महेंद्रगिरि
समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि INS महेंद्रगिरि का भारतीय नौसेना में शामिल होना देश के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन और निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण है तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान के साथ देश के रक्षा उद्योग और MSME सेक्टर की बढ़ती क्षमता का प्रमाण भी है। उन्होंने कहा कि INS महेंद्रगिरि भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने के साथ-साथ सुरक्षित और स्थिर हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा। यह युद्धपोत हर तरह के समुद्री अभियानों के लिए पूरी तरह मिशन-रेडी है।
महेंद्रगिरि नाम का महत्व
इस युद्धपोत का नाम पूर्वी घाट की महेंद्रगिरि पर्वतमाला के नाम पर रखा गया है, जो शक्ति, दृढ़ता और अटूट संकल्प का प्रतीक मानी जाती है। महेंद्रगिरि नाम धारण करने वाला यह भारतीय नौसेना का पहला युद्धपोत है। इसके शामिल होने से भारत की समुद्री विरासत में एक नया अध्याय जुड़ गया है।
INS महेंद्रगिरि (सोर्स- AI)
INS महेंद्रगिरि के निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और तकनीक का उपयोग किया गया है। इसके निर्माण में देश की कई प्रमुख रक्षा कंपनियों और बड़ी संख्या में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) ने योगदान दिया है। इससे रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।
प्रोजेक्ट-17A की बड़ी उपलब्धि
INS महेंद्रगिरि के नौसेना में शामिल होने के साथ ही प्रोजेक्ट-17A कार्यक्रम ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस श्रेणी के अन्य युद्धपोत पहले ही भारतीय नौसेना का हिस्सा बन चुके हैं। रक्षा मंत्री के अनुसार, INS नीलगिरि जनवरी 2025, INS उदयगिरि और INS हिमगिरि अगस्त 2025, INS तारागिरि अप्रैल 2026 तथा INS दुनागिरि जून 2026 में भारतीय नौसेना में शामिल किए जा चुके हैं।
Every warship has a journey.#Mahendragiri’s began with indigenous design and the craftsmanship that shaped her. As the sixth Project 17A Nilgiri-class frigate prepares for commissioning, today #11Jul 26, witness the making of a frontline combatant built for the Navy of… pic.twitter.com/C4lFtCALAY — SpokespersonNavy (@indiannavy) July 11, 2026
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INS महेंद्रगिरि के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा, युद्ध क्षमता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में परिचालन क्षमता को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही, यह भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता और वैश्विक स्तर पर उभरते रक्षा उद्योग की मजबूत पहचान को भी दर्शाता है।
