छात्रों पर पुलिस की बर्बरता पर HC सख्त, मोदी सरकार को भेजा नोटिस, CCTV और बॉडी कैम फुटेज नहीं होंगे डिलीट
CJP Protest: दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज मामले में केंद्र व दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत ने CCTV और बॉडी कैम फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।
- Written By: अर्पित शुक्ला
छात्रों पर पुलिस की बर्बरता (Image- Social Media)
Delhi Police Lathicharge Case: नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और कथित लाठीचार्ज को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने संबंधित CCTV फुटेज, बॉडी कैम रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को भी चार सप्ताह में अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने का समय दिया गया है।
याचिका में क्या कहा गया?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जबरन प्रदर्शन स्थल से हटाया गया।
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याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन और विकास सिंह ने दलील दी कि प्रदर्शनकारी अपने संवैधानिक अधिकारों शांतिपूर्ण सभा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा का प्रयोग कर रहे थे। उनका कहना था कि पुलिस की कार्रवाई संविधान के अनुरूप नहीं थी और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर बर्बर व्यवहार किया गया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि यदि पुलिस के अनुसार यह गैरकानूनी जमावड़ा था, तो कानून में ऐसी स्थिति से निपटने की स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित है।
अदालत ने रामलीला मैदान मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि जब बड़ी संख्या में लोगों से जुड़ा मामला हो, तो प्रत्येक व्यक्ति को अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराने के लिए कहना उचित नहीं हो सकता।
केंद्र सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी? (नोट: दिए गए पाठ के अनुसार एएसजी राजू) ने अदालत में कहा कि यदि किसी को एफआईआर दर्ज करानी है तो उसके लिए वैधानिक प्रक्रिया उपलब्ध है और संबंधित व्यक्ति मजिस्ट्रेट या पुलिस के पास जा सकता है।
उन्होंने यह भी दलील दी कि घटना के समय क्षेत्र में बीएनएसएस की धारा 163 (पूर्व धारा 144) के तहत निषेधाज्ञा लागू थी। सरकार का कहना था कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रहा, पुलिसकर्मी घायल हुए, सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा और ऐसी स्थिति में पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। एएसजी ने यह भी तर्क दिया कि याचिका केवल प्रचार पाने के उद्देश्य से दायर की गई है और इस पर नोटिस जारी करने की आवश्यकता नहीं है।
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अदालत ने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की। अदालत ने केवल केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा तथा निर्देश दिया कि मामले से जुड़े CCTV फुटेज, बॉडी कैम रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं, ताकि आगे की सुनवाई में उनका उपयोग किया जा सके।
