केजरीवाल, सिसोदिया समेत AAP नेताओं की बढ़ी मुश्किलें, कोर्ट ने जारी किया नोटिस, 4 हफ्तों में मांगा जवाब
Delhi Excise Policy Criminal Contempt Case: न्यायपालिका को बदनाम करने के सुनियोजित अभियान पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त। AAP नेताओं को अवमानना नोटिस जारी। अगस्त में होगी अगली सुनवाई।
- Written By: अमन मौर्या
अरविंद केजरीवाल (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Arvind Kejriwal Delhi HC Contempt Notice: शराब नीति मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को निशाना बनाने के संबंध में दिल्ली हाई कोर्ट ने आपराधिक अवमानना की कार्यवाही के तहत अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत अन्य को नोटिस जारी किया है। मंगलवार को आबकारी नीति मामले में कोर्ट में सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, सांसद संजय सिंह, पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज, विनय मिश्रा और दुर्गेश पाठक के खिलाफ अवमानना मामले में नोटिस जारी किया।
अगस्त में होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने नोटिस जारी कर सभी नेताओं से चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 4 अगस्त को होगी। सुनवाई के दौरान इन नेताओं की ओर से कोई भी अदालत में पेश नहीं हुआ। अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि सोशल मीडिया से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं और उन्हें कोर्ट रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाए। साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में एक एमिकस क्यूरी भी नियुक्त किया जाएगा।
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न्यायपालिका को बदनाम करने का आरोप
बता दें, 14 मई को कोर्ट ने केजरीवाल समेत पार्टी के कई अन्य नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी। कोर्ट ने माना कि आबकारी नीति मामले से जुड़ी कार्यवाही के संबंध में न्यायपालिका को बदनाम करने के लिए एक सुनियोजित अभियान चलाया गया था।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने एक विस्तृत आदेश जारी करते हुए कहा था कि जब उन्होंने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार कर दिया, तो उनके खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और सार्वजनिक बयान दिए गए, जो निष्पक्ष आलोचना और आपराधिक अवमानना के बीच की सीमा को पार कर गए।
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अविश्वास पैदा करने की कोशिश
मामले पर टिप्पणी करते हुए जज ने कहा था कि संबंधित पक्ष सुप्रीम कोर्ट जा सकता था। लेकिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से चिट्ठियां और वीडियो प्रसारित किए। इसमें राजनीतिक पक्षपात का भी आरोप लगाया गया। इसके माध्यम से यह संकेत दिया गया था कि इस अदालत से न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती।
कोर्ट के मुताबिक, उनका यह रवैया जनता में न्यायपालिका के प्रति अविश्वास पैदा करने की एक कोशिश थी। अगर इसे नहीं रोका गया, तो इससे अराजकता भी फैल सकती है। अवमानना की कार्यवाही शुरू होने के मद्देनजर जस्टिस शर्मा ने स्वयं को आबकारी नीति मामले की आगे की सुनवाई से अलग कर लिया था। इस पर अरविंद केजरीवाल ने प्रतिक्रया दी थी, सत्य की जीत हुई।
