दिल्ली के उत्तरी जिले में देर रात महसूस हुए 2.9 तीव्रता के भूकंप के झटके, जानिए क्यों बार-बार हिलती है राजधानी

Delhi Earthquake: देश की राजधानी दिल्ली के उत्तरी जिले में देर रात 2.9 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया था। दिल्ली सिस्मिक जोन-4 में आती है। गनीमत यह रही कि इससे कोई भारी नुकसान नहीं हुआ।
Delhi Earthquake: North District Feels 2.9 Magnitude Tremors At Late Night 
दिल्ली (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Delhi Earthquake North District Feels 2.9 Magnitude Tremors Late Night:  देश की राजधानी दिल्ली के उत्तरी जिले में देर रात रिक्टर स्केल पर 2.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार इस भूकंप का मुख्य केंद्र दिल्ली का उत्तरी जिला ही था। तीव्रता काफी कम होने के कारण गनीमत यह रही कि किसी भी तरह के जान-माल के भारी नुकसान की कोई भी खबर सामने नहीं आई है। स्थानीय लोग झटके महसूस होने के बाद काफी डर गए थे और अपने घरों के बाहर भी निकल आए थे।

सिस्मिक जोन-4 में आती है राजधानी

सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली सिस्मिक जोन-IV (Seismic Zone IV) के अंतर्गत आती है। यह श्रेणी किसी भी इलाके को भूकंप के दृष्टिकोण से मध्यम से उच्च जोखिम वाला क्षेत्र बनाती है। इसी वजह से यहां छोटे झटके भी लोगों के बीच चिंता पैदा कर देते हैं। इससे पहले 27 जून को भी दिल्ली और जम्मू-कश्मीर समेत उत्तर भारत में 6.2 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था, जिसका केंद्र अफगानिस्तान में था।

अप्रैल में भी उत्तर भारत में फैला था डर

इससे पहले अप्रैल के महीने में भी दिल्ली-एनसीआर, चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर समेत पूरे उत्तर भारत में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। जमीन अचानक हिलने के कारण लोग दहशत में आ गए थे और अपने-अपने घरों व दफ्तरों से बाहर की तरफ भागने लगे थे।

दिल्ली-एनसीआर के नीचे मौजूद हैं तीन फॉल्ट लाइन

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के नीचे तीन प्रमुख फॉल्ट लाइनें मौजूद हैं... दिल्ली-मुरादाबाद फॉल्ट लाइन, मथुरा फॉल्ट लाइन और सोहना फॉल्ट लाइन। जहां भी फॉल्ट लाइन होती है, वहीं भूकंप का केंद्र यानी एपिसेंटर बनता है।

जानिए क्यों आता है बार-बार भूकंप

भूगर्भ वैज्ञानिकों का कहना है कि भूकंप की मुख्य वजह जमीन के नीचे टेक्टोनिक प्लेटों में होने वाली तेज हलचल होती है। इसके अलावा उल्कापिंड के प्रभाव, ज्वालामुखी विस्फोट, खदानों में टेस्टिंग और न्यूक्लियर टेस्टिंग की वजह से भी धरती हिलती है। भूकंप की इस तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है।

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