प्रतिकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र के बीड जिले से एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। दरअसल, यहां के एक सरकारी अस्पताल में नकली दवाईयों का सप्लाई किया जा रहा था। इस दौरान मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस द्वारा चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, बीड के अंबाजोगाई में स्वामी रामानंद तीर्थ मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल एक प्रमुख अस्पताल है। यहां आसपास के जिलों से लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। मामले की जानकारी मिलने के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा अंबाजोगाई स्थित स्वामी रामानंद तीर्थ अस्पताल में विस्तृत जांच की गई। इस जांच के बाद पांच दिसंबर को मामला दर्ज किया गया था।
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अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान ‘एजिथ्रोमाइसिन’ की दवाईयां, औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 एवं नियम 1945 के तहत जांच में नकली पाई गईं। जांच में सामने आया कि महाराष्ट्र और गुजरात के चार आपूर्तिकर्ताओं से 50 लाख से अधिक गोलियां खरीदी गईं। इसके बाद उन पर भारतीय न्याय संहिता के तहत धोखाधड़ी एवं बेईमानी से किसी को सामान देने के लिए प्रेरित करने, जालसाजी, किसी और दवा के नाम पर फर्जी दवा बेचने या तैयार करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।
अंबाजोगाई मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के डीन शंकर धपटे ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इस दवा के नकली पाए जाने के बाद इसका उपयोग बंद कर दिया गया है। हालांकि, इससे अब तक जिन मरीजों को ये दवाईयां दी गई हैं, उनकी सेहत पर इसका बुरा असर भी पड़ सकता है। मरीजों के सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलना जरूरी है।
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बताया जा रहा है कि मामले का खुलासा तब हुआ जब मुंबई की एक लैब में इन दवाईयों के सैंपल्स भेजे गए। लैब टेस्ट के दौरान दवाईयों के नाम पर जहर बेचा जाने की जानकारी मिली। इसके बाद इन नकली दवाईयों को बेचने वाली कंपनियों के खिलाफ भी सख्त एक्शन लिए जा रहे हैं। गौरतलब है कि देश में धड़ल्ले से नकली दवाईयां बेची जाने की खबरे सामने आ रही है। इस कारण मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस मामले को ध्यान में रखते हुए पुलिस और खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से इसे रोकने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही मामले में पकड़े गए लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा रही है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)