CBI जांच की मांग करते हुए मृतक का परिवार (सोर्सः फाइल फोटो) 
क्राइम

Ambarnath का बिल्डर संजय पाटिल हत्याकांड में सीबीआई जांच की मांग, मुख्य आरोपी अभी भी हैं फरार

Sanjay Patil Murder Case: इंसाफ की राह में इंतजार बढ़ता जा रहा है। संजय पाटिल के परिजनों ने आरोप लगाया है कि मुख्य आरोपी अब भी फरार हैं और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच जरूरी है।

आलोक उमाकृष्ण

Family Demands CBI Investigation: बिल्डर संजय पाटिल की निर्मम हत्या के डेढ़ साल बाद भी मुख्य साजिशकर्ता और 15 से 20 अन्य हत्यारे फरार हैं। मृतक संजय पाटिल की पत्नी विद्या संजय पाटिल ने अपील की है कि पुलिस मामले की सही दिशा में जांच नहीं कर रही है, इसलिए जांच तुरंत सीबीआई को सौंप दी जाए। उन्होंने कहा कि इस मामले के आरोपी एक संगठित गिरोह के अपराधी हैं और उनसे परिवार को काफी खतरा है।

विद्या पाटिल ने अपने बच्चों हर्षदा पाटिल, क्रुणाली पाटिल और हार्दिक पाटिल के साथ रविवार को अंबरनाथ पूर्व स्थित रोटरी क्लब के अंबर हॉल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की और पुलिस प्रशासन के प्रति कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। पीड़ित महिला के पति संजय पाटिल को 22 अक्टूबर 2024 की रात अंबरनाथ पूर्व स्थित मेफ्लावर गार्डन बिल्डिंग के सामने चाकू से 32 वार कर निर्मम हत्या कि गयी।

इस मामले में पुलिस ने शुरू में दो आरोपी सूरज विलास पाटिल और हर्ष सुनील पाटिल को गिरफ्तार किया था। हालांकि पाटिल परिवार का दावा है कि हत्या सिर्फ दो लोगों ने नहीं, बल्कि 15 से 20 हत्यारों के एक गिरोह और एक बड़े मास्टरमाइंड ने की थी।

एसआईटी के गठन के बावजूद जांच रुकी हुई है।

विद्या पाटिल ने 1 दिसंबर, 2024 को सीबीआई जांच की मांग की थी क्योंकि स्थानीय पुलिस जांच में देरी कर रही थी और उन्हें संदेह था कि वे मामले को दबाने की कोशिश कर रही हैं। बाद में उन्होंने 14 फरवरी 2025 को मुंबई उच्च न्यायालय में न्याय की मांग करते हुए एक रिट याचिका दायर की। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने 22 दिसंबर 2025 को मामले की जांच एक विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपने का आदेश दिया।

अदालत के आदेश को पांच महीने बीत चुके हैं। उच्च न्यायालय के आदेशानुसार 12 जनवरी 2026 को ठाणे शहर के पुलिस आयुक्त ने इस अपराध की जांच आर्थिक अपराध शाखा के उपायुक्त पराग मानेरे को सौंप दी थी। अदालत ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया था कि जांच 12 सप्ताह के भीतर पूरी की जाए।

हालांकि इस आदेश के पांच महीने बीत जाने के बाद भी एक भी नया आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ है। मृतक संजय पाटिल की विधवा विद्या पाटिल का आरोप है कि जांच के संबंध में बार-बार पत्र व्यवहार करने के बावजूद कोई जानकारी नहीं दी जा रही है।

परिवार को है आरोपीयों से खतरा

मृतक के परिजनों का कहना है कि यदि हम लोगों को कुछ हुआ तो पुलिस ही जिम्मेदार होगी। क्योकिं  पुलिस प्रशासन ने अन्य मुख्य आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की हैं, जबकि हमने उनके खिलाफ सभी पुख्ता सबूत पेश किए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि आरोपी एक संगठित गिरोह का अपराधी है, इसलिए मेरी और मेरे बच्चों की जान को गंभीर खतरा है। भविष्य में हमारे परिवार के साथ कुछ भी बुरा होता है तो इसके लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार रहेगी।

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