छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: 42 आरोपियों के खिलाफ 27,000 पन्नों का चालान, 182 करोड़ का फर्जीवाड़ा

Chhattisgarh Liquor Scam : छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ACB/EOW ने 42 आरोपियों के खिलाफ 27,000 पन्नों का पूरक चालान पेश किया, जिसमें 182 करोड़ के मैनपावर भुगतान फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।
Chhattisgarh Liquor Scam: 27,000-page charge sheet against 42 accused; 182 crore fraud
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़ी ताज़ा जानकारीसोर्स : AI जेनरेट
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Highlights

  • शराब घोटाले में ईओडब्ल्यू ने नया पूरक चालान पेश किया।

  • मैनपावर एजेंसियों को 182 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान कराया गया।

  • फर्जी ओवरटाइम और बोनस दिखाकर किया गया बड़ा घोटाला।

  • अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया की मुख्य भूमिका मिली।

  • नए सबूतों के आधार पर अदालत में कार्रवाई आगे बढ़ी।

Chhattisgarh Liquor Scam Latest Update : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विशेष न्यायालय में पूरक चालान दाखिल किया है। जांच के मुताबिक, शासकीय शराब दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के नाम पर भारी अनियमितता बरती गई। पांच मैनपावर एजेंसियों को लगभग 182.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान कराया गया, जिससे सरकारी राजकोष को भारी चपत लगी।

जांच में यह बात सामने आई है कि कागजों में कर्मचारियों के ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के काम का झूठा रिकॉर्ड तैयार किया गया। हालांकि, यह पूरी रकम कभी भी जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों तक नहीं पहुंची। एजेंसियों के माध्यम से इस अतिरिक्त राशि को अवैध रूप से निकाला गया और इसका बड़ा हिस्सा कमीशन के रूप में आगे पहुंचाया गया।

अधिकारियों की भूमिका

ईओडब्ल्यू और एसीबी की शुरुआती जांच के अनुसार, अरुणपति त्रिपाठी मई 2019 से मई 2023 तक CSMCL के प्रबंध संचालक के पद पर तैनात थे। उनके कार्यकाल के दौरान निविदा की शर्तों में मनमाने बदलाव किए गए और भुगतान प्रणाली में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।

जांच एजेंसी का दावा है कि त्रिपाठी के कार्यकाल में ही पांचों एजेंसियों को लगभग 152.40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान मिला। इस रकम में ओवरटाइम के 82.66 करोड़ रुपये, बोनस के 12.21 करोड़ रुपये, चार अतिरिक्त दिनों के काम के 45.02 करोड़ रुपये और सेवा शुल्क के करीब 12.51 करोड़ रुपये शामिल बताए गए हैं।

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कमीशन और हवाला नेटवर्क

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि एजेंसियों से भारी मात्रा में नकद कमीशन वसूला जाता था। कथित तौर पर हर महीने 70 से 80 लाख रुपये का कमीशन एकत्र होता था। इस अवैध रकम को अरुणपति त्रिपाठी के माध्यम से अनवर ढेबर तक पहुंचाया जाता था। जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय द्वारा इस अवैध नेटवर्क से जुड़े करीब तीन करोड़ रुपये जब्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

इसके अलावा, बीआर लोहिया की कंपनियां ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड और अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड भी जांच के घेरे में हैं। इन दोनों कंपनियों को कुल मिलाकर लगभग 48.08 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान मिला। एजेंसियों द्वारा आंगड़िया नेटवर्क के जरिए 2019 से 2022 के बीच 60 से 70 करोड़ रुपये मुंबई और हैदराबाद भेजने के साक्ष्य भी मिले हैं।

लगातार जारी है जांच

मुख्य आरोपी बीआर लोहिया के बार-बार नोटिस भेजने के बावजूद पूछताछ में शामिल न होने पर एजेंसी ने उनके खिलाफ फरारी पंचनामा तैयार कर चालान पेश किया है। इस मामले में नवीन प्रताप सिंह तोमर और अनवर ढेबर समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ पहला चालान इसी साल मई में पेश किया जा चुका है। अब नए साक्ष्यों के मिलने के बाद यह पूरक चालान दाखिल किया गया है, और न्यायालय में सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय सामने आएगा।

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