

केशवपुर स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल में बाउंड्रीवॉल का निर्माण हुआ था।
इस निर्माण कार्य के लिए 1 करोड़ 32 लाख स्वीकृत हुए थे।
मामले में भारी वित्तीय और प्रक्रियागत अनियमितता पाई गई।
सामाजिक कार्यकर्ता अभय नारायण पांडे ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
अदालत ने तत्कालीन जनपद CEO समेत 9 पर FIR का निर्देश दिया।
Financial Irregularity Construction Scam Ambikapur : छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर में बड़ा प्रशासनिक फर्जीवाड़ा सामने आया है। केशवपुर स्वामी आत्मानंद स्कूल एवं कॉलेज परिसर में निर्माण कार्य हुआ था। इस निर्माण कार्य में 1 करोड़ 32 लाख 33 हजार रुपये खर्च हुए। अब इस राशि में भारी धांधली का आरोप सिद्ध हुआ है।
अदालत ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने तत्कालीन जनपद पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी पर FIR का निर्देश दिया है। उनके साथ 8 अन्य जिम्मेदार लोगों पर भी मामला दर्ज होगा। पुलिस जल्द ही सभी आरोपियों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करेगी।
इस मामले में जांच अधिकारियों ने कई अहम दस्तावेजों की पड़ताल की। माप पुस्तिका और कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र की जांच हुई। तकनीकी स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया में गंभीर खामियां पाई गईं। अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग करके नियमों की अनदेखी की।
सरकारी पैसे का इस्तेमाल तय मापदंडों के अनुसार नहीं किया गया। कागजों पर काम दिखाकर फंड जारी करने के आरोप लगे हैं। फर्जी दस्तावेज तैयार करके बजट का गबन किया गया है। अदालत ने इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने पुलिस को आरोपियों पर धोखाधड़ी, जालसाजी, कागजों में हेरफेर, साजिश रचने और भ्रष्टाचार रोकने से जुड़े कानून की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने को कहा है।
यह आदेश सामाजिक कार्यकर्ता अभय नारायण पांडे की वजह से आया है। उन्होंने इस गड़बड़ी के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी। जब बार-बार शिकायत करने के बाद भी प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया, तब उन्होंने हार न मानकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
अदालत के सख्त आदेश के बाद पुलिस अब जांच शुरू करेगी। पुलिस निर्माण कार्य से जुड़े सभी बिल और बैंक लेन-देन खंगालेगी। निविदा प्रक्रिया और माप पुस्तिका के हर पन्ने की जांच होगी। इसमें शामिल जनप्रतिनिधियों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी।
दोषी साबित होने पर आरोपियों की गिरफ्तारी संभव है। इसके अलावा गबन की गई सरकारी राशि की वसूली की जाएगी। दोषी अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई का रास्ता भी साफ हो गया है। इस फैसले से भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।