Bilaspur हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: विवाहेत्तर संबंधों वाली महिलाओं को नहीं मिलेगा तलाक के बाद गुजारा भत्ता
बिलासपुर हाईकोर्ट ने रायपुर फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें एक पति को अपनी तलाकशुदा पत्नी को 4,000 रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था।
- Written By: सौरभ शर्मा
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला (फोटो- सोशल मीडिया)
रायपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि यदि कोई महिला विवाह के दौरान किसी अन्य पुरुष के साथ संबंध बनाती है, तो उसे तलाक के बाद अपने पूर्व पति से गुजारा भत्ता पाने का अधिकार नहीं रहेगा। कोर्ट ने रायपुर फैमिली कोर्ट के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें एक व्यक्ति को अपनी तलाकशुदा पत्नी को हर महीने चार हजार रुपये देने के निर्देश दिए गए थे। यह फैसला पारिवारिक मामलों में नैतिकता और कानून के संतुलन को नए तरीके से परिभाषित करता है।
इस मामले में महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भत्ते की राशि बढ़ाकर बीस हजार रुपये करने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने यह स्पष्ट करते हुए याचिका को खारिज कर दिया कि विवाह के पवित्र रिश्ते को तोड़ने वाली महिला किसी भी तरह के भरण-पोषण की हकदार नहीं है। कोर्ट ने यह फैसला सबूतों के आधार पर सुनाया जिसमें महिला के देवर के साथ संबंध की पुष्टि हुई थी।
पति ने पेश किए थे विवाहेतर संबंधों के सबूत
रायपुर निवासी युवक ने दावा किया था कि उसकी पत्नी का उसके छोटे भाई के साथ अवैध संबंध था, जिससे उनका दांपत्य जीवन टूट गया। 2021 में महिला ससुराल छोड़कर चली गई थी और तलाक के बाद भरण-पोषण की मांग की थी। कोर्ट में सबूतों के आधार पर यह साबित हुआ कि महिला ने विवाह के दौरान ही व्यभिचार किया।
सम्बंधित ख़बरें
फिरोजाबाद आरव हत्याकांड: डेढ़ साल के मासूम के हत्यारे को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा; 40 दिन में मौत का फरमान
विस्फोटक फैक्ट्रियों में हादसों की जांच के लिए केंद्र ने बनाई विशेष समिति; नागपुर हाई कोर्ट में सुनवाई टली
नागपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: CRPC की धारा 91 के तहत पुलिस आरोपी को दस्तावेज पेश करने का नोटिस नहीं दे सकती
करूर भगदड़ मामले में CM विजय को राहत, पीड़ित परिवारों को बांटेंगे सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र
हाईकोर्ट ने भत्ते का आदेश रद्द किया
रायपुर फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश में महिला को हर महीने चार हजार रुपये भत्ता देने को कहा गया था। लेकिन हाईकोर्ट ने इसे गलत मानते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि विवाहेतर संबंध रखने वाली महिला का भत्ते पर कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं रह जाता। ये फैसला देशभर में उन मामलों के लिए मिसाल बन सकता है, जहां विवाह के बाद किसी एक पक्ष की अनैतिकता के बावजूद उसे आर्थिक लाभ मिल रहा हो। कोर्ट ने कानून के दायरे में रहते हुए स्पष्ट किया कि विवाह की गरिमा को ठेस पहुंचाने वालों को न्यायिक सहानुभूति नहीं दी जा सकती।
